Wednesday, August 12, 2026

सबसे मुश्किल जाँच वो होती है, जहाँ आपका दिल पागलों की तरह यह दुआ कर रहा हो कि मुजरिम बेकसूर निकले। नवंबर की उस उदास और खामोश दोपहर में, शर्मा निवास के बेडरूम का तापमान अचानक शून्य से भी नीचे गिर गया था. कमरे में हीटर नहीं था, खिडकियाँ बंद थीं, और बाहर की गुनगुनी धूप परदों से छनकर बिस्तर पर गिर रही थी, लेकिन सावी का पूरा शरीर किसी बर्फीले तूफान के बीच खडे होने जैसा काँप रहा था. उसके कानों में एक अजीब सी, बहरी कर देने वाली भिनभिनाहट थी. यह आवाज किसी मशीन की नहीं थी, बल्कि उसके अपने ही दिमाग के पुर्जों के आपस में टकराने और टूटने की आवाज थी. बिस्तर पर, उस भारी, खाकी रंग के' जेड- डेल्टा- नाइन' वाले सरकारी लिफाफे के ठीक बगल में, वो पानी से गला हुआ, मटमैला कागज का टुकडा पडा था. और सावी की आँखें उस टुकडे पर इस कदर गडी थीं, जैसे वो कोई कागज नहीं, बल्कि कोई ऐसा जहरीला साँप हो जो फन काढे बैठा हो और किसी भी पल उसे डस लेगा. जो रास्ते दिखाई देते हैं, मंजिल अक्सर उनसे दूर होती है। पेरिस की उस खूनी सर्विस लेन में कूरियर की कार के टायरों के पास मिला वो कागज. और दूसरी तरफ, उसके दिमाग में गूँजती हुई कल शाम की वो आवाज. मनीष की आवाज. वही ठहराव, वही गहराई, वही अंदाज. जब वो ड्राइंग Room की दरी पर बैठकर रिया को स्कूल का होमवर्क करवा रहा था. जो लफ्ज कागज पर मौन हैं, असली शोर उन्हीं की खामोशी में पलता है। सावी ने अपने दोनों हाथों से अपने सिर को कसकर पकड लिया. वो इस सोच को अपने दिमाग से बाहर निकाल फेंकना चाहती थी. वो चाहती थी कि कोई उसके दिमाग की नसों को खींच दे, उसकी याददाश्त मिटा दे, ताकि उसे इन दोनों वाक्यों के बीच का वो खौफनाक, अदृश्य धागा दिखाई न दे. नहीं. सावी के सूखे हुए होंठों से एक बहुत ही बेबस, फुसफुसाती हुई आवाज निकली. ऐसा नहीं हो सकता. यह सिर्फ एक इत्तेफाक है. एक बहुत ही भद्दा, भयानक इत्तेफाक। लेकिन' इत्तेफाक' या' संयोग' खुफिया दुनिया का सबसे बडा झूठ है. एक जासूस को अपनी Training के पहले दिन ही यह सिखाया जाता है कि दुनिया में संयोग नाम की कोई चीज नहीं होती. अगर दो चीजें एक जैसी दिखती हैं, तो उनके पीछे कोई न कोई पैटर्न जरूर होता है. सावी का दिल चीख- चीख कर कह रहा था कि यह संयोग है, लेकिन उसका प्रशिक्षित दिमाग अब पूरी तरह से बगावत पर उतर आया था. एजेंट छोटी इलायची' जाग चुकी थी, और इस बार उसका शक किसी अजनबी पर नहीं, बल्कि उसी इंसान पर था जिसके नाम का सिंदूर वो अपनी माँग में सजाती थी. सावी झटके से बिस्तर से उठी. उसकी साँसें धौंकनी की तरह चल रही थीं. वो लगभग दौडती हुई ड्राइंग Room में गई. वहाँ टेबल पर रिया की किताबें और कॉपियाँ अभी भी सलीके से रखी हुई थीं. सावी ने काँपते हाथों से रिया की वो हिंदी की कॉपी ढूँढी जिसमें उसने कल रात का होमवर्क किया था. कॉपी मिल गई. सावी ने उसे सीने से लगाया और वापस अपने बेडरूम में आकर दरवाजा अंदर से लॉक कर लिया. उसने रिया की वो कॉपी बिस्तर पर खोली. नीले पेन से, बच्चों वाली गोल मटोल लिखाई में वो लाइन लिखी हुई थी जो मनीष ने उसे बोलकर लिखवाई थी. सावी ने पेरिस वाले उस मटमैले कागज को उठाया और रिया की कॉपी के ठीक बगल में रख दिया. अब दोनों वाक्य आमने- सामने थे. सावी ने एक गहरी साँस ली और एक जासूस की तरह उन दोनों वाक्यों का' फॉरेंसिक विश्लेषण' शुरू किया. उसने सबसे पहले लिखावट देखी. पेरिस वाले कागज पर जो लिखावट थी, वो बहुत ही तेज, नुकीली और कोणीय थी. ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने बहुत जल्दबाजी में, लेकिन बेहद आत्मविश्वास के साथ उन शब्दों को कागज पर उकेरा हो. स्याही काले रंग की थी और शब्दों के बीच की दूरी बहुत ही सटीक थी, जो अक्सर यूरोपीय या पश्चिमी देशों में पढे- लिखे लोगों की लिखावट में पाई जाती है. और मनीष की लिखावट? सावी को मनीष की लिखावट बहुत अच्छी तरह याद थी. वो हमेशा नीले या हरे रंग के पेन का इस्तेमाल करता था. उसके अक्षर गोल होते थे, थोडे फैले हुए, जैसे कोई पुराना सरकारी बाबू फाइलें लिखता हो. उसमें कोई नुकीलापन नहीं था, कोई हडबडी नहीं थी. सावी के सीने में जो एक भारी पत्थर रखा था, वो अचानक थोडा हल्का हो गया. उसने एक लंबी राहत की साँस छोडी. लिखावट बिल्कुल अलग है, सावी ने खुद से कहा. उसके होठों पर एक बहुत ही दयनीय, लेकिन उम्मीद से भरी मुस्कान आ गई. शब्द भी बिल्कुल अलग हैं. एक में रास्ते और मंजिल का जिक्र है, दूसरे में लफ्ज और खामोशी का. मैं भी कितनी पागल हूँ. मैं खामखाँ बातों का बतंगड बना रही हूँ. कहाँ पेरिस का वो खतरनाक कूरियर, और कहाँ मेरा सीधा- साधा मनीष। उसने उस कागज को हटाने के लिए हाथ बढाया. वो इस बेतुकी जाँच को यहीं खत्म कर देना चाहती थी. लेकिन तभी. उसके दिमाग के उस अचेतन, जासूसी हिस्से ने एक ऐसा सवाल उठाया जिसने उसकी उस राहत की साँस को गले में ही जमा दिया. लिखावट अलग है. शब्द अलग हैं. लेकिन क्या इनकी रूह अलग है? सावी का हाथ हवा में ही रुक गया. उसने उन दोनों वाक्यों को फिर से पढा. इस बार शब्दों की तरह नहीं, बल्कि एक' सिफर' की तरह. खूफिया तंत्र में, विशेषकर उन एजेंसियों में जो बहुत ही पुराने और गहरे स्तर पर काम करती हैं, डिजिटल एन्क्रिप्शन से ज्यादा' साहित्यिक कूटलेखन' पर भरोसा किया जाता है. कंप्यूटर हैक हो सकते हैं, लेकिन इंसानी दिमाग की लय हैक नहीं हो सकती. सावी ने दोनों वाक्यों के' व्याकरण' और' मीटर' को अपने दिमाग में गिनना शुरू किया. वाक्य एक: जो रास्ते दिखाई देते हैं, मंजिल अक्सर उनसे दूर होती है। वाक्य दो: जो लफ्ज कागज पर मौन हैं, असली शोर उन्हीं की खामोशी में पलता है। दोनो वाक्यों की शुरुआत एक' विरोधाभास' से होती है. जो दिखता है, वो है नहीं. जो मौन है, वो शोर है. दोनों वाक्यों को बोलते समय बीच में एक बहुत ही सटीक, अस्वाभाविक सा ठहराव आता है. दोनों वाक्यों में अक्षरों का उतार- चढाव एक बहुत ही पुरानी, सूफी या क्लासिकल शायरी की तरह है, जिसे आज की बोलचाल की भाषा में इस्तेमाल नहीं किया जाता. यह एक' कॉल एंड रिस्पांस' प्रोटोकॉल था. अगर कोई एक एजेंट किसी भीड- भाड वाले इलाके में या किसी संचार माध्यम पर पहला वाक्य बोलेगा, तो दूसरा एजेंट उसे पहचानने के लिए उसी' लय' में दूसरा वाक्य बोलेगा. उन्हें एक ही शब्द बोलने की जरूरत नहीं है, उन्हें सिर्फ उस' काव्यात्मक साँचे' को फॉलो करना है. इससे दुनिया को लगेगा कि दो लोग बस किसी कविता या शायरी की बात कर रहे हैं, लेकिन असल में वे एक- दूसरे की पहचान प्रमाणित कर रहे होंगे. सावी का सिर चकराने लगा. अगर मनीष ने सिर्फ इत्तेफाक से कोई लाइन बोली होती, तो उसकी लय पेरिस के उस कूरियर के' डेड ड्रॉप' नोट से इतनी खौफनाक हद तक मेल कैसे खा सकती थी? क्या मनीष को यह' साँचा' पता था? क्या उसे इसी भाषा में बात करने की Training दी गई थी? नहीं! नहीं! नहीं! सावी अपने बिस्तर से उठ खडी हुई. वो पीछे हटती गई जब तक कि उसकी पीठ ठंडी दीवार से नहीं टकरा गई. सावी का दिमाग चिल्ला- चिल्ला कर सबूत पेश कर रहा था, लेकिन उसका दिल पूरी ताकत से बगावत कर रहा था. यह एक ऐसी जंग थी जहाँ जीतने वाला भी सब कुछ हारने वाला था. मैं पागल हो रही हूँ, सावी ने अपने बालों को मुट्ठी में भींचते हुए कहा. यह पीटीएसडी (PTSD) है. यह पेरिस का सदमा है. मैं अपने ही घर को, अपने ही प्यार को अपनी इस दिमागी बीमारी से तबाह कर रही हूँ। उसने आँखें बंद कीं और मनीष की उन यादों को ढूँढने लगी जो उसकी बेगुनाही साबित कर सकें. उसे याद आया कि कैसे मनीष को छिपकलियों से डर लगता था. एक बार घर में छिपकली आ गई थी, तो वो सोफे के ऊपर चढकर खडा हो गया था और तब तक नहीं उतरा जब तक सावी ने उसे भगा नहीं दिया. क्या एक हाई- लेवल अंडरकवर एजेंट छिपकली से डरेगा? उसे याद आया कल रात का वो नजारा. मनीष ने आटा गूँथते वक्त अपना पूरा हाथ चिपका लिया था. उसने रोटियाँ जला दी थीं. वो अपनी ही बेटी के होमवर्क से परेशान हो गया था. क्या दुनिया की कोई भी खुफिया एजेंसी इतने अनाडी इंसान को अपना एजेंट बनाएगी? मनीष मेरा है. वो कोई जासूस नहीं है. वो बस एक क्लर्क है, जिसे शायरी का शौक है. उसने कोई गजल पढी होगी, कोई किताब पढी होगी, और उसी की कोई लाइन उसके दिमाग में रह गई होगी. यह एक संयोग है. दुनिया में आठ सौ करोड लोग हैं, दो लोगों के ख्यालों की लय एक जैसी हो सकती है. इसमें कुछ भी खौफनाक नहीं है! सावी अपने आप को ये दलीलें दे रही थी. वो खुद को मनाने की कोशिश कर रही थी. वो इस शक की आग पर अपनी यादों का पानी डाल रही थी. तभी दिमाग के उस अंधेरे कोने से एक और विचार साँप की तरह रेंगता हुआ बाहर आया. सावी, क्या तुम्हारे पडोसियों को पता है कि तुम कौन हो? क्या कुसुम या विमला ताई को पता है कि तुमने पेरिस में कितने लोगों की जान ली है? तुम भी तो रोटियाँ बेलती हो. तुम भी तो सब्जी वाले से दस रुपये के लिए लडती हो. तुम भी तो करवा चौथ का व्रत रखती हो. अगर दुनिया की सबसे बेहतरीन जासूस एक साधारण हाउसवाइफ का रूप ले सकती है. तो क्या एक दूसरा जासूस एक' अनाडी, कविताएं लिखने वाले सीधे- सादे पति' का रूप नहीं ले सकता? छिपकली से डरना, रोटियाँ जलाना. क्या ये सब एक बहुत ही बारीकी से डिजाइन किया गया' कवर लीजेंड' नहीं हो सकता? चुप रहो! सावी ने जोर से फुसफुसाते हुए अपने ही दिमाग को डाँटा. उसके आँखों से आँसू बहने लगे. वो इस सच्चाई का सामना नहीं कर सकती थी. अगर मनीष निर्दोष नहीं था, अगर वो भी उसी दलदल का हिस्सा था जिससे सावी लड रही थी, तो सावी की पूरी जिंदगी एक झूठ थी. उसका प्यार, उसकी शादी, उसके बच्चे. सब एक साजिश की बुनियाद पर खडे थे. मैं ज्यादा सोच रही हूँ, सावी ने अपने आँसू पोंछे. मैं एक बहुत ही बीमार, शक्की और खराब इंसान बन गई हूँ. मनीष ने मुझे इतना प्यार दिया, और मैं उसे सिर्फ एक कागज के टुकडे पर तौल रही हूँ. मुझे इसे खत्म करना होगा. मुझे इस शक को जड से मिटाना होगा। सावी ने दीवार का सहारा छोडा और तेज कदमों से बिस्तर की तरफ आई. उसने तय कर लिया था कि वो इस कागज को, इस सुराग को, और अपने इस भयानक शक को हमेशा के लिए जला देगी. वो अपनी शादी को इस जासूसी वहम की भेंट नहीं चढने देगी. उसने पेरिस वाला वो मटमैला कागज उठाया. लेकिन जैसे ही उसने उसे फाडने के लिए अपने हाथ बढाए, उसकी उंगलियाँ काँपने लगीं. एक जासूस कभी भी सबूत नष्ट नहीं करता. चाहे वो सबूत उसके अपने ही दिल के टुकडे क्यों न कर दे. उसे पेरिस में मारा गया रिषि याद आ गया. उसे राणा sir का वो खून से सना हुआ पेट याद आ गया. अगर यह कागज उस बहुत बडी साजिश की एक छोटी सी कडी है, अगर यह कागज उन हत्यारों तक पहुँचने का इकलौता रास्ता है, तो क्या वो सिर्फ अपने पति को बचाने के लिए, अपनी मानसिक शांति के लिए, इसे जला सकती है? सावी का दिल चीख रहा था कि इसे फाड दो, इसे जला दो. लेकिन उसकी रूह, जो इस देश की हिफाजत की कसमें खा चुकी थी, वो उसे ऐसा करने से रोक रही थी. सावी ने एक बीच का रास्ता निकाला. एक ऐसा रास्ता जो उसके दिल और दिमाग दोनों को कुछ देर के लिए शांत कर दे. उसने अपना फोन उठाया. उसने कैमरा ऑन किया और उस मटमैले कागज की बहुत ही साफ, हाई- रेजोल्यूशन तस्वीर खींच ली. फिर वो कमरे के कोने में रखे छोटे से स्टडी टेबल की तरफ गई, जहाँ बच्चों के स्कूल प्रोजेक्ट्स के लिए एक छोटा सा वाई- फाई प्रिंटर रखा था. उसने फोन से कमांड दी. घुर्रर्र. ज्ज्ज्ज्. प्रिंटर की वो यांत्रिक आवाज उस खामोश कमरे में गूँजी. कुछ ही सेकंड में, एक साफ, सफेद ए- फोर कागज बाहर निकल आया, जिस पर उस पेरिस वाले नोट की एक ब्लैक- एंड- व्हाइट छपी हुई थी. सावी ने उस नई कॉपी को उठाया और वो पेरिस वाला असली, मटमैला कागज वहीं टेबल पर छोड दिया. वो कॉपी लेकर बाथरूम की तरफ गई. बाथरूम में जाकर उसने सिंक के ऊपर वो कागज रखा. उसने शेल्फ से एक माचिस की डिब्बी निकाली. उसके हाथ बुरी तरह से काँप रहे थे. एक तीली निकाली और उसे डिब्बी पर रगडा. छर्र! एक छोटी सी, पीली- नीली लौ जल उठी. सावी ने उस लौ को उस सफेद कागज के किनारे पर लगा दिया. कागज ने आग पकड ली. वो जलने लगा. सावी उस जलते हुए कागज को देख रही थी. आग की वो लौ कागज के साथ- साथ मानो सावी के उस शक को भी भस्म कर रही थी. काले धुएँ की एक लकीर हवा में उठी और कागज राख में तब्दील होकर सिंक के सफेद बेसिन में गिर गया. सावी ने नल खोल दिया. पानी की धार ने उस काली राख को बहा दिया. सब कुछ नाली में बह गया. उसने एक बहुत ही गहरी, लंबी साँस ली. उसने अपनी आँखें बंद कीं और खुद को तसल्ली दी. खत्म. सब खत्म. वो सिर्फ एक वहम था. मैंने उसे जला दिया. अब कोई शक नहीं. अब कोई जाँच नहीं। वो एक आजाद इंसान की तरह बाथरूम से बाहर आई. उसने यह महसूस करने की कोशिश की कि उसने अपने दिमाग से वो' वायरस' निकाल फेंका है. लेकिन जब वो वापस बेडरूम में आई, तो उसकी नजर स्टडी टेबल पर गई. वहाँ, उस पुराने, जंग लगे टिन के डिब्बे के ठीक बगल में. पेरिस वाला वो असली, मटमैला कागज अभी भी रखा हुआ था. सुरक्षित. अछूता. सावी वहीं रुक गई. उसने कॉपी को जलाया था. उसने अपने शक की एक नकली परछाई को जलाया था. लेकिन असली सबूत. असली सच को जलाने की हिम्मत वो नहीं जुटा पाई थी. वो खुद से झूठ बोल रही थी. वो जानती थी कि उसने वो असली कागज सिर्फ इसलिए बचाया है क्योंकि उसके दिमाग के उस गहरे, खौफनाक कोने ने इस बात को स्वीकार कर लिया था कि मनीष पर जाँच करना जरूरी है. सावी ने बहुत ही भारी मन से वो असली कागज उठाया. उसने उस जंग लगे टिन के डिब्बे को खोला, जिसमें उसके बचपन की वो तीन- चार रहस्यमयी तस्वीरें रखी थीं. उसने वो कागज उन तस्वीरों के बिल्कुल नीचे छिपा दिया और डिब्बे का ढक्कन कसकर बंद कर दिया. डिब्बे का बंद होना इस बात का ऐलान था कि शक मरा नहीं था, वो बस सही वक्त का इंतजार करने के लिए तहखाने में छिप गया था. शाम के सात बज चुके थे. कमरे में अँधेरा घिरने लगा था. सावी अभी भी उसी डिब्बे को घूर रही थी. तभी, मुख्य दरवाजे का ताला खुलने की आवाज आई. क्लिक- क्लैक. मनीष घर आ गया था. सावी तुरंत अपनी जगह से उठी. उसने अपने चेहरे को अपने दोनों हाथों से थपथपाया, ताकि उसकी त्वचा में रंग लौट आए. उसने अपनी साडी ठीक की और एक बहुत ही सधी हुई, घरेलू मुस्कान अपने चेहरे पर ओढ ली. वो बेडरूम से बाहर हॉल में आई. मनीष ने अपना बैग सोफे पर रखा हुआ था. वो अपनी टाई ढीली कर रहा था. उसने सावी को आते हुए देखा. हाय सावी, मनीष ने मुस्कुराते हुए कहा. उसकी आवाज में दिन भर की वो आम सी थकान थी. लेकिन आज सावी उसे उस तरह से नहीं देख पा रही थी जैसे वो हमेशा देखती थी. आज जब मनीष मुस्कुराया, तो सावी की नजरें उसकी आँखों की गहराई नाप रही थीं. जब मनीष ने अपनी टाई उतारी, तो सावी की नजरें उसकी कलाई के मूवमेंट पर थीं. वो हर चीज का विश्लेषण कर रही थी. मनीष ने रसोई की तरफ जाते हुए गैस पर चाय का पानी चढाया. आज तो चाय मैं ही बनाऊँगा. बहुत सिर दर्द है दफ्तर के काम से। सावी डाइनिंग टेबल की कुर्सी पर चुपचाप बैठ गई. मनीष ने चाय में अदरक कूटी और फिर मुडकर सावी की तरफ देखा. उसकी आँखें जो हमेशा बहुत भोली लगती थीं, इस वक्त सावी के चेहरे पर बहुत ही गहराई से गडी थीं. मनीष की वो निगाह. वो एक पति की निगाह नहीं थी. वो एक ऐसी निगाह थी जो सामने वाले के चेहरे के पीछे छिपे हुए भावों को स्कैन कर रही थी. कुछ परेशान लग रही हो? मनीष ने बहुत ही साधारण, कैजुअल तरीके से पूछा. लेकिन उसकी आवाज में एक अजीब सा ठहराव था. सावी के सीने में एक बर्फीली सिहरन दौड गई. क्या मनीष ने उसकी घबराहट को पढ लिया था? क्या वो उसका' बेसलाइन टेस्ट' कर रहा था? सावी के पास सच बोलने का विकल्प नहीं था. अगर वो सच बोलती, तो यह घर उसी पल किसी युद्ध के मैदान में बदल जाता. उसे अपने पति से नहीं, बल्कि अपने सबसे बडे संदिग्ध से बात करनी थी. सावी ने अपनी आँखों में एक बहुत ही प्राकृतिक सी थकान लाई. उसने अपने होंठों को एक फीकी सी मुस्कान दी. नहीं. बस थोडी सी थकान है, सावी ने बहुत ही सहजता से कहा. आज पूरे घर की सफाई जो की है. कुछ नहीं, चाय पिऊँगी तो ठीक हो जाऊँगी। यह सावी शर्मा का मनीष शर्मा से बोला गया पहला जानबूझकर, सोची- समझी साजिश के तहत बोला गया झूठ था. मनीष ने उसे कुछ पल और देखा. फिर वो मुस्कुराया. तुम भी ना, जान निकाल लेती हो काम में. बैठो, मैं कडक चाय लाता हूँ। मनीष वापस गैस की तरफ मुड गया. सावी अपनी जगह पर बैठी रही. उसका दिल इतनी जोर से धडक रहा था कि उसे डर था कहीं मनीष उसे सुन न ले. उसने अपने ही पति से झूठ बोला था. जाँच आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी थी. कोई फाइल नहीं बनी थी, कोई टीम नहीं थी, लेकिन एक पत्नी ने अपने पति के खिलाफ शक की उस अँधेरी सुरंग में पहला खौफनाक कदम रख दिया था. अब यहाँ से लौटने का कोई रास्ता नहीं था. सावी, जो अब तक बाहरी दुश्मनों से लडती थी, अब अपने ही घर के अंदर एक' अंडरकवर' पत्नी की तरह कैसे काम करेगी? मनीष की दिनचर्या का वो कौन सा हिस्सा होगा जो सावी की इस खामोश जाँच में सबसे पहला सुराग बनकर उभरेगा? क्या मनीष सावी के इस झूठ को पकड चुका है, और क्या वो भी अपनी पत्नी के खिलाफ कोई जवाबी चाल चलने वाला है?

Sunday, August 9, 2026

Secret Pulse Promo 1

पुण्याच्या एका सुधारगृहाच्या त्या दमट, कुबट कॉरिडॉरमध्ये पहाट कधीच सुंदर नसते. बाहेरच्या जगात याच वेळी कदाचित पहाटेचं कोवळं धुकं पसरलेलं असतं, पक्ष्यांची किलबिल सुरू होते, कुणीतरी चहाचा कप हातात घेऊन गॅलरीत उभं असतं. पण या भिंतींच्या आत पहाट होते ती एका जीवघेण्या, कर्कश आवाजाने — लोखंडी लाठीचा गजांवर आदळणारा 'ठक... ठक...' आणि वॉर्डनची कानाचे पडदे फाडणारी शिट्टी. आणि याच जगात, वयाच्या अवघ्या सोळाव्या वर्षी, अश्लेषा रोज एक नवा दिवस "जगत" नाही — फक्त "टिकून" राहते. फिनाईलचा उग्र वास, ओलसर भिंतींचा कुबट दर्प आणि कायमस्वरूपी दाटून असलेली एक जड उदासी — हेच आता तिचं संपूर्ण जग आहे. तिची चूक काय होती? तिने असा कोणता गुन्हा केला होता, की तिला या भिंतींच्या आत ढकललं गेलं? हे सुधारगृह तिला वाचवण्यासाठी होतं, की तिला आणखी खोल गाडण्यासाठी — हे उत्तर तितकं सोपं नाहीये जितकं वाटतं. कारण बाहेरच्या जगातल्या राक्षसांपासून वाचण्यासाठी तिने जे पाऊल उचललं होतं, त्याचीच शिक्षा म्हणून ती इथे आलीये — अशा एका पिंजऱ्यात, जिथे रोज नवे राक्षस तिची वाट पाहत असतात. अश्लेषाला दोन नियम माहीत आहेत: कोणाच्या नजरेला नजर द्यायची नाही, आणि रडायचं असेल तर ते फक्त आतल्या आत, कुणालाही न दिसता. कारण इथे कमकुवतपणा दाखवला की, लोकं तुम्हाला जिवंतपणी खातात — हे तिला तिच्या पहिल्याच आठवड्यात एका भयंकर पद्धतीने शिकवलं गेलं होतं. भैरवी — या सुधारगृहातली सगळ्यात मोठी दहशत — रोज तिला लक्ष्य करते. तिचं ताट मुद्दाम सांडवलं जातं, तिचे केस ओढले जातात, तिला सगळ्यांसमोर गुडघ्यावर बसून जमीन पुसायला भाग पाडलं जातं. आणि आजूबाजूला उभ्या असलेल्या पन्नास मुलींपैकी एकही तिच्या मदतीला येत नाही — कारण इथे प्रत्येकजण फक्त स्वतःचा जीव वाचवत असतो. कुणालाही नाहक भैरवीच्या हिट-लिस्टवर यायचं नसतं. तिच्या मनातली एक आर्त हाक रोज त्या जाड, दगडी भिंतींना धडकून परत तिच्याचकडे येते — "कुणीतरी... कुणीतरी मला इथून बाहेर काढा... किंवा मला वाचवा..." तिला वाटतं की ती या नरकात एकटीच, याच अंधाऱ्या कोपऱ्यात एक दिवस संपून जाईल. कुणाला तिची आठवणही येणार नाही. पण अश्लेषाला हे माहीत नाहीये, की तिच्या या शांत, घाबरलेल्या आणि एकाकी आयुष्यात लवकरच एक असं भयंकर आणि सुंदर वादळ धडकणार आहे — जे या भिंती, हे नियम आणि तिची ही भीती, सगळं काही मुळासकट उखडून फेकणार आहे. कोण आहे ही व्यक्ती, जी अश्लेषाचं संपूर्ण जग बदलून टाकणार आहे? आणि ती या नरकात इतक्या सहजपणे कशी पोहोचणार आहे, जिथे पन्नास मुलींपैकी कुणालाही पोहोचता आलं नाही? एका मुलीच्या तुटलेल्या श्वासांत लपलेली ही गोष्ट, तुम्हाला पहिल्या भागापासूनच अस्वस्थ करेल — आणि थांबूही देणार नाही. ही गोष्ट फक्त एका जेलमधल्या मुलीची नाही. ही गोष्ट आहे — प्रत्येक वेळी जेव्हा जग तुम्हाला "संपलात" म्हणून घोषित करतं, तेव्हाही आतमध्ये कुठेतरी जिवंत राहणाऱ्या त्या एका ठिणगीची. अश्लेषाच्या आयुष्यातलं ते वादळ नक्की कोण आहे, आणि ते तिला वाचवणार आहे की आणखी खोल ढकलणार आहे — हे जाणून घेण्यासाठी "Secret Pulse" जरूर वाचा. ~.~.~.~ "काही भेटी या योगायोग नसतात, त्या नियतीने आधीच ठरवलेल्या असतात. जसं अंधाराला चिरत येणारा एखादा प्रकाशकिरण... जो सुरुवातीला डोळे दिपवतो, पण नंतर त्याच प्रकाशाची सवय होते." ती एक नवीन मुलगी होती. वय तेच... अश्लेषाएवढंच, सोळा. पण तिच्यात आणि इथल्या बाकीच्या मुलींमध्ये जमीन-अस्मानाचा फरक होता. सहसा इथे येणारी नवीन मुलगी रडत, गयावया करत, वॉर्डनच्या पाया पडत किंवा भीतीने थरथरत आत येते. तिचे डोळे सुजलेले असतात आणि खांदे निराशेने खाली पडलेले असतात. पण ही? तिची पावलं जमिनीवर अत्यंत ठामपणे पडत होती. अंगावर तोच जेलचा सैल, निस्तेज निळ्या रंगाचा युनिफॉर्म होता, पण तो तिने असा काही कॅरी केला होता, जणू ती कुठल्या कॉलेजच्या कॅम्पसमध्ये चालत आलीये. तिची कॉलर किंचित उभी होती, आणि मानेवर रुळणारे तिचे केस एका रबरबँडने बांधलेले होते. तिच्या हातात एक जाडजूड, जुन्या बांधणीची डायरी आणि पेन होतं. ती डायरी तिने आपल्या छातीशी अशी धरली होती, जणू तो तिचा सर्वात मोठा खजिना होता. ~.~.~.~ "प्रतीलिपीवर सारख्याच धाटणीच्या CEO Romance, Surrogate Mother किंवा कौटुंबिक कटकारस्थानांच्या कथा वाचून काहीतरी वेगळं वाचायची इच्छा होतेय?" मग तयार व्हा... 💛 Fresh Sci-Fi Romance ❤️ Emotion 🕵️ Suspense 🤝 Friendship 💔 Unpredictable Twists अशी कथा, जिथे प्रत्येक भाग संपताना तुमच्या मनात एकच प्रश्न असेल... 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कधीकधी जो चेहरा आपण कधीच बघितलेला नसतो, तोच चेहरा आपल्याला सगळ्यात जास्त समजून घेतो. एका मुलीच्या आयुष्यात एक असा अनोळखी मित्र आहे, जो तिला रोज आधार देतो, तिचं ऐकतो, तिला सावरतो — पण जो कधीच तिच्यासमोर येत नाही. हा आभासी आवाज तिच्यासाठी इतका महत्त्वाचा का बनलाय, की वास्तवातल्या कुणाहीपेक्षा तिला त्याच्यावर जास्त विश्वास वाटतो? आणि सगळ्यात मोठा प्रश्न — हा अनोळखी आवाज खरंच अनोळखी आहे का? की तो तिच्या रोजच्या आयुष्यातच, तिच्या अगदी जवळ, एका वेगळ्याच रूपात वावरतोय? हे रहस्य जितकं गोड आहे, तितकंच ते उलगडल्यावर उद्ध्वस्त करणारंही ठरू शकतं. हा आभासी मित्र कोण आहे, आणि सत्य समोर आल्यावर काय घडतं, हे जाणून घेण्यासाठी "तू भेट ना... नव्याने" वाचा. ~.~.~.~ काही रस्ते असे असतात, जिथे आपली पावले नकळत कुणाकडे तरी वळतात, गर्दीत शेकडो चेहरे असतात, पण शोध मात्र एकाच अनोळखी ओळखीचा असतो... कधी कधी नजरेची भेट होत नाही, पण जाणवणारा तो एक क्षण, पुढच्या संपूर्ण प्रवासाची नांदी ठरतो... विदर्भ एक्सप्रेसने आपला नेहमीचा वेग कमी केला आणि खिडकीतून येणाऱ्या वाऱ्यात अचानक एक वेगळाच दमटपणा आणि समुद्राचा खारा दर्प जाणवू लागला. किंजलने खिडकीबाहेर डोकावून पाहिले. लोकल ट्रेनच्या त्या जाळ्या, रुळांचा तो अवाढव्य पसारा आणि दूरवर दिसणाऱ्या उंचच उंच इमारती... मुंबई आली होती! "ताई, चल बॅगा दरवाज्याजवळ घेऊया. दादर आलंय," अनुजने वरच्या बर्थवरून सुटकेस खाली काढत म्हटले. बाबांनीही आपली पिशवी हातात घेतली. किंजलच्या हृदयाची धडधड आता प्रचंड वाढली होती. हे तेच शहर होतं, ज्याची तिने आतापर्यंत फक्त स्वप्ने पाहिली होती. ~.~.~.~ "प्रतीलिपीवर सारख्याच धाटणीच्या CEO Romance, Surrogate Mother किंवा कौटुंबिक कटकारस्थानांच्या कथा वाचून काहीतरी वेगळं वाचायची इच्छा होतेय?" मग तयार व्हा... 💛 Fresh College Romance ❤️ Emotion 🕵️ Suspense 🤝 Friendship 💔 Unpredictable Twists अशी कथा, जिथे प्रत्येक भाग संपताना तुमच्या मनात एकच प्रश्न असेल... "आता पुढे काय होणार?" 👀 आणि आता येते सर्वात भन्नाट बातमी... 🥳 🎉 या कथेचे भाग आधीच लिहून पूर्ण झाले आहेत! हो... बरोबर वाचलंत! म्हणजे एकदा या कथेच्या प्रेमात पडलात की... "पुढचा भाग कधी येणार?" अशी वाट बघायची गरजच नाही! 😉 --- 📖 प्रतिलिपीवर नवीन आहात? मग हे नक्की वाचा... माझ्या कथा वाचण्यासाठी तुमच्याकडे दोन पर्याय आहेत. 🌟 पर्याय १: Superfan बना (Recommended) फक्त ₹२५/महिना मध्ये Superfan Membership घ्या आणि... ✨ सगळे Parts... सगळे १० Seasons एकाच वेळी Unlock करा! 📚 मनसोक्त Binge Read करा. 🚫 No Waiting. No Rok-Tok. ❤️ मी पण तुम्हाला मध्येच थांबवणार नाही! यासोबतच माझ्या इतर सर्व कथा आणि कथामालिकाही सलग वाचता येतील. --- 📚 पर्याय २: Free मध्ये वाचा माझ्या Pratilipi Profile ला Follow करा. Nishigandha Omanwar ❤️ 📖 १५वा भाग पूर्ण झाल्यावर, दररोज एक नवीन भाग मोफत Unlock होईल. 🔔 Profile Follow केल्यावर पुढचा Free Part उपलब्ध होताच Notification मिळेल. --- 👇 कथेची लिंक खाली कमेंटमध्ये दिली आहे. आजच Story Library मध्ये Add करा आणि एका वेगळ्याच कॉलेज रोमांसच्या, मैत्रीच्या आणि सस्पेन्सने भरलेल्या प्रवासाला सुरुवात करा! 💛 वाचल्यानंतर Comment करून नक्की सांगा... पहिल्याच भागाने तुम्हाला किती गुंतवलं? 💬 Because... ❤️ Keep Reading. Keep Loving. Keep Bingeing. (All kinds of love are accepted in the form of ❤️ Likes • 💬 Comments • 🔄 Shares • ⭐ Ratings • 🎁 Stickers • 🌟 Superfan.) तुमची, Natkhat Nishi❤️ https://marathi.pratilipi.com/series/tu-bhet-naa-navyane-by-online-pl8jeatqnedm

TBN,.. Navyane Promo 4

काही भेटवस्तू फक्त वस्तू नसतात — त्या एका नव्या जगाचं दार उघडतात. एका साध्या क्षणी दिलेली एक साधी भेटवस्तू, आणि त्यातून सुरू होणारा एक असा प्रवास, जो पुढे जाऊन दोन आयुष्यं कायमची जोडणार आहे. पण या भेटवस्तूमागे लपलेलं कोडं इतकं साधं नाहीये. एका आभासी जगातून येणारी एक साद, एक आवाज, ज्याला चेहरा नाही — पण जो हळूहळू एका अनोळखी मनाच्या सगळ्यात जवळचा आधार बनतो. हा आवाज कोणाचा आहे? आणि तो इतक्या अचूक वेळी, इतक्या आपुलकीने का बोलतो? एका बाजूला वास्तवातलं एकटेपण आहे, आणि दुसऱ्या बाजूला एका अनोळखी आवाजाने दिलेला दिलासा. पण हे दोन जग एकमेकांत मिसळले, तर काय घडेल — याची कल्पनाही अजून कुणाला नाहीये. ती भेटवस्तू आणि तो आभासी आवाज पुढे कुठे घेऊन जातात, हे जाणून घेण्यासाठी "तू भेट ना... नव्याने" वाचा. ~.~.~.~ कधी कधी एका अनोळखी वाटेवर पडलेलं पाऊल, आयुष्याची पूर्ण दिशाच बदलून टाकतं... शब्दांच्या त्या अदृश्य जाळ्यात मन असं काही अडकतं, की खऱ्या जगाचा विसर पडायला एक क्षणही पुरतो... दुसऱ्या दिवशीची सकाळ नेहमीसारखीच होती. खिडकीतून येणारी उन्हाची तिरीप आणि स्वयंपाकघरातून येणारा फोडणीचा खमंग वास. किंजल नुकतीच उठून डोळे चोळत बाहेर आली होती. काल रात्रीच्या त्या रस्ता चुकण्याच्या प्रसंगामुळे ती अजूनही थोडी शांतच होती. ती बेसिनजवळ तोंड धूत असतानाच अनुज तिच्या मागे येऊन उभा राहिला. त्याच्या हातात एक चकचकीत, पांढऱ्या रंगाचा बॉक्स होता. "अनुज...!! काय हे? मला नको आहे म्हणाले होते ना मी काल..." किंजलचा आवाज आश्चर्याने आणि थोड्या रागाने चढला होता. तिने तो बॉक्स ओळखला होता. तो एका नवीन, महागड्या स्मार्टफोनचा बॉक्स होता. "जगातली पहिली व्यक्ती आहे ही, जी भेटवस्तू 'नको नको' म्हणत असेल..." अनुज हसत हसत तिथेच आलेल्या आईकडे बघत म्हणाला. ~.~.~.~ "प्रतीलिपीवर सारख्याच धाटणीच्या CEO Romance, Surrogate Mother किंवा कौटुंबिक कटकारस्थानांच्या कथा वाचून काहीतरी वेगळं वाचायची इच्छा होतेय?" मग तयार व्हा... 💛 Fresh College Romance ❤️ Emotion 🕵️ Suspense 🤝 Friendship 💔 Unpredictable Twists अशी कथा, जिथे प्रत्येक भाग संपताना तुमच्या मनात एकच प्रश्न असेल... "आता पुढे काय होणार?" 👀 आणि आता येते सर्वात भन्नाट बातमी... 🥳 🎉 या कथेचे भाग आधीच लिहून पूर्ण झाले आहेत! हो... बरोबर वाचलंत! म्हणजे एकदा या कथेच्या प्रेमात पडलात की... "पुढचा भाग कधी येणार?" अशी वाट बघायची गरजच नाही! 😉 --- 📖 प्रतिलिपीवर नवीन आहात? मग हे नक्की वाचा... माझ्या कथा वाचण्यासाठी तुमच्याकडे दोन पर्याय आहेत. 🌟 पर्याय १: Superfan बना (Recommended) फक्त ₹२५/महिना मध्ये Superfan Membership घ्या आणि... ✨ सगळे Parts... सगळे १० Seasons एकाच वेळी Unlock करा! 📚 मनसोक्त Binge Read करा. 🚫 No Waiting. No Rok-Tok. ❤️ मी पण तुम्हाला मध्येच थांबवणार नाही! यासोबतच माझ्या इतर सर्व कथा आणि कथामालिकाही सलग वाचता येतील. --- 📚 पर्याय २: Free मध्ये वाचा माझ्या Pratilipi Profile ला Follow करा. Nishigandha Omanwar ❤️ 📖 १५वा भाग पूर्ण झाल्यावर, दररोज एक नवीन भाग मोफत Unlock होईल. 🔔 Profile Follow केल्यावर पुढचा Free Part उपलब्ध होताच Notification मिळेल. --- 👇 कथेची लिंक खाली कमेंटमध्ये दिली आहे. आजच Story Library मध्ये Add करा आणि एका वेगळ्याच कॉलेज रोमांसच्या, मैत्रीच्या आणि सस्पेन्सने भरलेल्या प्रवासाला सुरुवात करा! 💛 वाचल्यानंतर Comment करून नक्की सांगा... पहिल्याच भागाने तुम्हाला किती गुंतवलं? 💬 Because... ❤️ Keep Reading. Keep Loving. Keep Bingeing. (All kinds of love are accepted in the form of ❤️ Likes • 💬 Comments • 🔄 Shares • ⭐ Ratings • 🎁 Stickers • 🌟 Superfan.) तुमची, Natkhat Nishi❤️ https://marathi.pratilipi.com/series/tu-bhet-naa-navyane-by-online-pl8jeatqnedm

TBN... Navyane Promo3

मुंबईच्या गजबजाटापासून कोसो दूर, अकोल्याच्या एका साध्या घरात, सकाळ वेगळ्याच पद्धतीने उगवते. इथे नाही टेबल लॅम्पचा झगमगाट, नाही ड्राफ्टिंग बोर्डवरचा तो आत्मविश्वास — इथे आहे एक मुलगी, जिच्या स्वप्नांना जागा आहे, पण परिस्थितीने हात बांधलेले आहेत. एक साधा पिंपल, घरातलं एक वादळ, आणि रोजच्या जगण्याची एक वेगळीच लढाई — या मुलीचं जग ओंकारच्या जगापासून हजारो मैल दूर आहे. आणि तरीही, नियतीने या दोन पूर्णपणे वेगळ्या जगांना एकाच धाग्यात गुंफण्याचं आधीच ठरवलेलं आहे. ती कोण आहे? आणि तिच्या या साध्या, संघर्षमय जगाचा ओंकारच्या झगमगत्या जगाशी संबंध तरी काय? हा प्रश्न जितका साधा वाटतो, तितकंच याचं उत्तर तुम्हाला अस्वस्थ करणारं आहे. अकोल्यातल्या या मुलीची आणि ओंकारची कहाणी कुठे जाऊन भिडते, हे जाणून घेण्यासाठी "तू भेट ना... नव्याने" वाचा. ~.~.~.~ काही क्षण आयुष्याचे असे असतात, जिथे आकाश मोकळं असूनही पाखराला घरटं सोडावंसं वाटत नसतं... कारण त्या घरट्यातली ऊब, बाहेरच्या कोणत्याही स्वातंत्र्यापेक्षा, जास्त हवीहवीशी आणि सुरक्षित वाटत असते... १२वीच्या बोर्ड परीक्षेचे ते सलग जागरण, आयुष्यातील 'टर्निंग पॉईंट' असण्याचा तो अवाढव्य ताण, आणि रात्र-रात्र जागून अभ्यास करण्याची ती कसरत... हे सगळं कालच संपलं होतं. तिचा तो अभ्यासाचा टेबल, ज्यावर कालपर्यंत पुस्तकांचे आणि गाईड्सचे ढीग पडले होते, तो आज एकदम रिकामेपणाची जाणीव करून देत होता. कालचा भूगोलाचा शेवटचा पेपर देऊन आल्यावर तिच्या मनावरचे एक मोठे ओझे उतरले होते. आजची सकाळ तिला फक्त आणि फक्त तिच्या झोपेसाठी हवी होती. तिला स्वतःचे अस्तित्व विसरून, त्या गोधडीत गुपचूप गुंडाळून घ्यायचे होते. ~.~.~.~ "प्रतीलिपीवर सारख्याच धाटणीच्या CEO Romance, Surrogate Mother किंवा कौटुंबिक कटकारस्थानांच्या कथा वाचून काहीतरी वेगळं वाचायची इच्छा होतेय?" मग तयार व्हा... 💛 Fresh College Romance ❤️ Emotion 🕵️ Suspense 🤝 Friendship 💔 Unpredictable Twists अशी कथा, जिथे प्रत्येक भाग संपताना तुमच्या मनात एकच प्रश्न असेल... "आता पुढे काय होणार?" 👀 आणि आता येते सर्वात भन्नाट बातमी... 🥳 🎉 या कथेचे भाग आधीच लिहून पूर्ण झाले आहेत! हो... बरोबर वाचलंत! म्हणजे एकदा या कथेच्या प्रेमात पडलात की... "पुढचा भाग कधी येणार?" अशी वाट बघायची गरजच नाही! 😉 --- 📖 प्रतिलिपीवर नवीन आहात? मग हे नक्की वाचा... माझ्या कथा वाचण्यासाठी तुमच्याकडे दोन पर्याय आहेत. 🌟 पर्याय १: Superfan बना (Recommended) फक्त ₹२५/महिना मध्ये Superfan Membership घ्या आणि... ✨ सगळे Parts... सगळे १० Seasons एकाच वेळी Unlock करा! 📚 मनसोक्त Binge Read करा. 🚫 No Waiting. No Rok-Tok. ❤️ मी पण तुम्हाला मध्येच थांबवणार नाही! यासोबतच माझ्या इतर सर्व कथा आणि कथामालिकाही सलग वाचता येतील. --- 📚 पर्याय २: Free मध्ये वाचा माझ्या Pratilipi Profile ला Follow करा. Nishigandha Omanwar ❤️ 📖 १५वा भाग पूर्ण झाल्यावर, दररोज एक नवीन भाग मोफत Unlock होईल. 🔔 Profile Follow केल्यावर पुढचा Free Part उपलब्ध होताच Notification मिळेल. --- 👇 कथेची लिंक खाली कमेंटमध्ये दिली आहे. आजच Story Library मध्ये Add करा आणि एका वेगळ्याच कॉलेज रोमांसच्या, मैत्रीच्या आणि सस्पेन्सने भरलेल्या प्रवासाला सुरुवात करा! 💛 वाचल्यानंतर Comment करून नक्की सांगा... पहिल्याच भागाने तुम्हाला किती गुंतवलं? 💬 Because... ❤️ Keep Reading. Keep Loving. Keep Bingeing. (All kinds of love are accepted in the form of ❤️ Likes • 💬 Comments • 🔄 Shares • ⭐ Ratings • 🎁 Stickers • 🌟 Superfan.) तुमची, Natkhat Nishi❤️

TBN...Navyane Promo2

काही माणसं जन्मताच गर्दीत उठून दिसतात. ओंकार त्यातलाच एक — देखणा, हुशार, आत्मविश्वासाने भरलेला, आणि कॉलेजमध्ये ज्याच्या शब्दाबाहेर कुणी जात नाही असा एक 'हिरो'. पण याच दबदब्याच्या मागे एक असा अहंकार लपलाय, जो कधीतरी त्याच्याच पायाखालची जमीन सरकवणार आहे. डिझाईन स्टुडिओतली त्याची सत्ता, कँटीनमधली त्याची 'कटिंग' आणि इतरांकडे बघण्याचा तो तुच्छतेचा दृष्टिकोन — हे सगळं त्याच्या आयुष्यात लवकरच एका मोठ्या आरशासमोर उभं राहणार आहे. आणि याच गर्दीत, त्याच्या नजरेच्या टप्प्याबाहेर, एक अशी मुलगी आहे जिच्याकडे तो ढुंकूनही बघत नाही — पण जिच्यामुळे त्याचं संपूर्ण आयुष्य बदलणार आहे. अहंकाराचा हा महाल किती काळ टिकेल? आणि तो जेव्हा कोसळेल, तेव्हा त्याखाली नेमकं कोण दबेल? ओंकारचा हा दबदबा आणि त्यामागचं खरं वादळ अनुभवण्यासाठी "तू भेट ना... नव्याने" वाचा. ~.~.~.~ मैत्री म्हणजे जुन्या इमारतीचा तो भक्कम पाया असते, ज्यावर कितीही मोठी वादळे आली तरी, विश्वासाची भिंत कधीच कोसळत नाही... ती फक्त उभी राहते, प्रत्येक ऋतूत, प्रत्येक सावलीत... ओंकार आपल्या नेहमीच्या कोपऱ्यातल्या टेबलाजवळ उभा होता. त्याची काळ्या रंगाची ड्राफ्टिंग ट्यूब त्याच्या पाठीवर होती. तो अत्यंत शांतपणे आपल्या आजूबाजूचा गोंधळ बघत होता. तेवढ्यात समोरून पीटर धावत आला. त्याचे केस विस्कटलेले होते, शर्टाची बटणे वेडीवाकडी लागली होती आणि हातात एक अर्धी-अधुरी डिझाईन शीट होती. "वाचव भावा... आज माझा मर्डर फिक्स आहे. कदम सर आज मला कच्चं खातील!" पीटर धापा टाकत ओंकारच्या अंगावरच कोसळला. "भावा, माझं डिझाईन बघ ना. टॉयलेटचा ब्लॉक चुकून किचनच्या वर आलाय माझ्या प्लॅनमध्ये... सर बघतील तर मला त्याच टॉयलेटमध्ये फ्लश करतील!" पीटरने अक्षरशः रडवा चेहरा केला. ~.~.~.~ "प्रतीलिपीवर सारख्याच धाटणीच्या CEO Romance, Surrogate Mother किंवा कौटुंबिक कटकारस्थानांच्या कथा वाचून काहीतरी वेगळं वाचायची इच्छा होतेय?" मग तयार व्हा... 💛 Fresh College Romance ❤️ Emotion 🕵️ Suspense 🤝 Friendship 💔 Unpredictable Twists अशी कथा, जिथे प्रत्येक भाग संपताना तुमच्या मनात एकच प्रश्न असेल... "आता पुढे काय होणार?" 👀 आणि आता येते सर्वात भन्नाट बातमी... 🥳 🎉 या कथेचे भाग आधीच लिहून पूर्ण झाले आहेत! हो... बरोबर वाचलंत! म्हणजे एकदा या कथेच्या प्रेमात पडलात की... "पुढचा भाग कधी येणार?" अशी वाट बघायची गरजच नाही! 😉 --- 📖 प्रतिलिपीवर नवीन आहात? मग हे नक्की वाचा... माझ्या कथा वाचण्यासाठी तुमच्याकडे दोन पर्याय आहेत. 🌟 पर्याय १: Superfan बना (Recommended) फक्त ₹२५/महिना मध्ये Superfan Membership घ्या आणि... ✨ सगळे Parts... सगळे १० Seasons एकाच वेळी Unlock करा! 📚 मनसोक्त Binge Read करा. 🚫 No Waiting. No Rok-Tok. ❤️ मी पण तुम्हाला मध्येच थांबवणार नाही! यासोबतच माझ्या इतर सर्व कथा आणि कथामालिकाही सलग वाचता येतील. --- 📚 पर्याय २: Free मध्ये वाचा माझ्या Pratilipi Profile ला Follow करा. Nishigandha Omanwar ❤️ 📖 १५वा भाग पूर्ण झाल्यावर, दररोज एक नवीन भाग मोफत Unlock होईल. 🔔 Profile Follow केल्यावर पुढचा Free Part उपलब्ध होताच Notification मिळेल. --- 👇 कथेची लिंक खाली कमेंटमध्ये दिली आहे. आजच Story Library मध्ये Add करा आणि एका वेगळ्याच कॉलेज रोमांसच्या, मैत्रीच्या आणि सस्पेन्सने भरलेल्या प्रवासाला सुरुवात करा! 💛 वाचल्यानंतर Comment करून नक्की सांगा... पहिल्याच भागाने तुम्हाला किती गुंतवलं? 💬 Because... ❤️ Keep Reading. Keep Loving. Keep Bingeing. (All kinds of love are accepted in the form of ❤️ Likes • 💬 Comments • 🔄 Shares • ⭐ Ratings • 🎁 Stickers • 🌟 Superfan.) तुमची, Natkhat Nishi❤️ https://marathi.pratilipi.com/series/tu-bhet-naa-navyane-by-online-pl8jeatqnedm

Saturday, August 8, 2026

TBN Navyane.. promo1

पहाटेचे साडेपाच वाजलेत. दादरच्या एका जुन्या मध्यमवर्गीय वस्तीत, एका खोलीत टेबल लॅम्पचा पिवळसर प्रकाश अजूनही तेवतोय. रात्रभर जागून, आठ तास ड्राफ्टिंग बोर्डवर वाकून काम करणारा ओंकार — त्याचे डोळे लालबुंद आहेत, बोटांवर ग्रॅफाईटचे डाग आहेत, पण चेहऱ्यावर एक विलक्षण समाधान आहे. इमारती फक्त विटा आणि सिमेंटने उभ्या राहत नाहीत, तर त्या उभ्या राहतात माणसांच्या श्वासांवर, त्यांच्या आठवणींवर — हा ओंकारचा विश्वास आहे. आणि हाच विश्वास त्याला त्याच्या बाबांनी, श्रीकांतरावांनी दिलाय — ज्यांच्या डोळ्यांतल्या अभिमानासाठी ओंकार रोज स्वतःला घडवतो आहे. पण नियतीच्या आराखड्यात असं काही लिहिलेलं आहे, जे ओंकारच्या या सुंदर, रेखीव जगाला लवकरच हादरे देणार आहे. एक असं वळण, ज्याची त्याला आत्ता पुसटशीही कल्पना नाही. बाप-लेकाचं हे नातं, हे स्वप्न, आणि त्यामागे लपलेलं ते न दिसणारं वादळ — हा प्रवास सुरुवातीपासूनच तुमचं काळीज घट्ट पकडून ठेवेल. ओंकारच्या आयुष्यातला हा 'निळाशार आराखडा' त्याला कुठे घेऊन जातो, हे जाणून घेण्यासाठी "तू भेट ना... नव्याने" जरूर वाचा. ~.~.~.~ स्वप्नांच्या निळ्याशार कागदावर... रेखाटतोय मी आयुष्याचा नवा आराखडा, जिथे प्रत्येक रेषेला आहे एक अर्थ, आणि प्रत्येक वळणावर आहे एक नवा धडा... पहाटेचे साडेपाच वाजले होते. दादरच्या त्या जुन्या, मध्यमवर्गीय वस्तीत अजूनही रात्रीचा एक मवाळ आळस रेंगाळत होता. खिडकीबाहेरच्या प्राजक्ताच्या झाडावरून टपटप पडणाऱ्या फुलांचा मंद सुगंध आणि कुठूनतरी दूरवरून येणारा लोकल ट्रेनचा धूसर, लयबद्ध आवाज... हे सगळं मुंबईच्या पहाटेचं एक नेहमीचं पण तितकंच हवहवंसं वाटणारं संगीत होतं. पण या शांततेतही ओंकारच्या खोलीत मात्र एक वेगळीच लगबग रात्रीपासूनच थांबलेली नव्हती. टेबल लॅम्पचा तो पिवळसर प्रकाश ओंकारच्या चेहऱ्यावर पडला होता. रात्रीचे जागरण आणि सलग आठ तास ड्राफ्टिंग बोर्डवर वाकून काम केल्यामुळे त्याचे डोळे लालबुंद झाले होते. बोटांवर ग्रॅफाईटचे काळे डाग पडले होते आणि पाठीचा कणा अक्षरशः दुखून निघाला होता. पण त्याच्या चेहऱ्यावर मात्र एक विलक्षण समाधान होतं. त्याने हातातली 'रोटरिंग पेन' बाजूला ठेवली आणि एक दीर्घ श्वास घेत आपल्या समोरच्या त्या मोठ्या A0 साईझच्या ड्रॉईंग शीटवर नजर फिरवली. कदम सरांची ती शेवटची आणि सर्वात कठीण 'डिझाईन सबमिशन' त्याने अखेर पूर्ण केली होती. एका जुन्या, पडक्या वाड्याचे त्याने केलेले ते 'री-डिझाईन' त्याच्या मेहनतीची साक्ष देत होते. इमारती फक्त विटा आणि सिमेंटने उभ्या राहत नाहीत, तर त्या उभ्या राहतात त्या माणसांच्या श्वासावर, त्यांच्या आठवणींवर... हा त्याचा विचार त्या डिझाईनच्या प्रत्येक रेषेतून स्पष्ट दिसत होता. "चला, फायनली डन!" तो स्वतःशीच पुटपुटला. त्याने ती शीट अत्यंत काळजीपूर्वक गुंडाळली आणि आपल्या काळ्या रंगाच्या 'ड्राफ्टिंग ट्यूब'मध्ये ठेवून दिली. खिडकीतून आत येणाऱ्या पहाटेच्या गार वाऱ्याने त्याला अचानक झोपेची जाणीव करून दिली. तो थेट बेडवर कोसळला आणि त्याने गोधडी तोंडावर ओढून घेतली. ~.~.~.~ "प्रतीलिपीवर सारख्याच धाटणीच्या CEO Romance, Surrogate Mother किंवा कौटुंबिक कटकारस्थानांच्या कथा वाचून काहीतरी वेगळं वाचायची इच्छा होतेय?" मग तयार व्हा... 💛 Fresh College Romance ❤️ Emotion 🕵️ Suspense 🤝 Friendship 💔 Unpredictable Twists अशी कथा, जिथे प्रत्येक भाग संपताना तुमच्या मनात एकच प्रश्न असेल... "आता पुढे काय होणार?" 👀 आणि आता येते सर्वात भन्नाट बातमी... 🥳 🎉 या कथेचे भाग आधीच लिहून पूर्ण झाले आहेत! हो... बरोबर वाचलंत! म्हणजे एकदा या कथेच्या प्रेमात पडलात की... "पुढचा भाग कधी येणार?" अशी वाट बघायची गरजच नाही! 😉 --- 📖 प्रतिलिपीवर नवीन आहात? मग हे नक्की वाचा... माझ्या कथा वाचण्यासाठी तुमच्याकडे दोन पर्याय आहेत. 🌟 पर्याय १: Superfan बना (Recommended) फक्त ₹२५/महिना मध्ये Superfan Membership घ्या आणि... ✨ सगळे Parts... सगळे १० Seasons एकाच वेळी Unlock करा! 📚 मनसोक्त Binge Read करा. 🚫 No Waiting. No Rok-Tok. ❤️ मी पण तुम्हाला मध्येच थांबवणार नाही! यासोबतच माझ्या इतर सर्व कथा आणि कथामालिकाही सलग वाचता येतील. --- 📚 पर्याय २: Free मध्ये वाचा माझ्या Pratilipi Profile ला Follow करा. Nishigandha Omanwar ❤️ 📖 १५वा भाग पूर्ण झाल्यावर, दररोज एक नवीन भाग मोफत Unlock होईल. 🔔 Profile Follow केल्यावर पुढचा Free Part उपलब्ध होताच Notification मिळेल. --- 👇 कथेची लिंक खाली कमेंटमध्ये दिली आहे. आजच Story Library मध्ये Add करा आणि एका वेगळ्याच कॉलेज रोमांसच्या, मैत्रीच्या आणि सस्पेन्सने भरलेल्या प्रवासाला सुरुवात करा! 💛 वाचल्यानंतर Comment करून नक्की सांगा... पहिल्याच भागाने तुम्हाला किती गुंतवलं? 💬 Because... ❤️ Keep Reading. Keep Loving. Keep Bingeing. (All kinds of love are accepted in the form of ❤️ Likes • 💬 Comments • 🔄 Shares • ⭐ Ratings • 🎁 Stickers • 🌟 Superfan.) तुमची, Natkhat Nishi❤️
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सबसे मुश्किल जाँच वो होती है, जहाँ आपका दिल पागलों की तरह यह दुआ कर रहा हो कि मुजरिम बेकसूर निकले। नवंबर की उस उदास और खामोश दोपहर में, शर्...