Wednesday, August 12, 2026

सबसे मुश्किल जाँच वो होती है, जहाँ आपका दिल पागलों की तरह यह दुआ कर रहा हो कि मुजरिम बेकसूर निकले। नवंबर की उस उदास और खामोश दोपहर में, शर्मा निवास के बेडरूम का तापमान अचानक शून्य से भी नीचे गिर गया था. कमरे में हीटर नहीं था, खिडकियाँ बंद थीं, और बाहर की गुनगुनी धूप परदों से छनकर बिस्तर पर गिर रही थी, लेकिन सावी का पूरा शरीर किसी बर्फीले तूफान के बीच खडे होने जैसा काँप रहा था. उसके कानों में एक अजीब सी, बहरी कर देने वाली भिनभिनाहट थी. यह आवाज किसी मशीन की नहीं थी, बल्कि उसके अपने ही दिमाग के पुर्जों के आपस में टकराने और टूटने की आवाज थी. बिस्तर पर, उस भारी, खाकी रंग के' जेड- डेल्टा- नाइन' वाले सरकारी लिफाफे के ठीक बगल में, वो पानी से गला हुआ, मटमैला कागज का टुकडा पडा था. और सावी की आँखें उस टुकडे पर इस कदर गडी थीं, जैसे वो कोई कागज नहीं, बल्कि कोई ऐसा जहरीला साँप हो जो फन काढे बैठा हो और किसी भी पल उसे डस लेगा. जो रास्ते दिखाई देते हैं, मंजिल अक्सर उनसे दूर होती है। पेरिस की उस खूनी सर्विस लेन में कूरियर की कार के टायरों के पास मिला वो कागज. और दूसरी तरफ, उसके दिमाग में गूँजती हुई कल शाम की वो आवाज. मनीष की आवाज. वही ठहराव, वही गहराई, वही अंदाज. जब वो ड्राइंग Room की दरी पर बैठकर रिया को स्कूल का होमवर्क करवा रहा था. जो लफ्ज कागज पर मौन हैं, असली शोर उन्हीं की खामोशी में पलता है। सावी ने अपने दोनों हाथों से अपने सिर को कसकर पकड लिया. वो इस सोच को अपने दिमाग से बाहर निकाल फेंकना चाहती थी. वो चाहती थी कि कोई उसके दिमाग की नसों को खींच दे, उसकी याददाश्त मिटा दे, ताकि उसे इन दोनों वाक्यों के बीच का वो खौफनाक, अदृश्य धागा दिखाई न दे. नहीं. सावी के सूखे हुए होंठों से एक बहुत ही बेबस, फुसफुसाती हुई आवाज निकली. ऐसा नहीं हो सकता. यह सिर्फ एक इत्तेफाक है. एक बहुत ही भद्दा, भयानक इत्तेफाक। लेकिन' इत्तेफाक' या' संयोग' खुफिया दुनिया का सबसे बडा झूठ है. एक जासूस को अपनी Training के पहले दिन ही यह सिखाया जाता है कि दुनिया में संयोग नाम की कोई चीज नहीं होती. अगर दो चीजें एक जैसी दिखती हैं, तो उनके पीछे कोई न कोई पैटर्न जरूर होता है. सावी का दिल चीख- चीख कर कह रहा था कि यह संयोग है, लेकिन उसका प्रशिक्षित दिमाग अब पूरी तरह से बगावत पर उतर आया था. एजेंट छोटी इलायची' जाग चुकी थी, और इस बार उसका शक किसी अजनबी पर नहीं, बल्कि उसी इंसान पर था जिसके नाम का सिंदूर वो अपनी माँग में सजाती थी. सावी झटके से बिस्तर से उठी. उसकी साँसें धौंकनी की तरह चल रही थीं. वो लगभग दौडती हुई ड्राइंग Room में गई. वहाँ टेबल पर रिया की किताबें और कॉपियाँ अभी भी सलीके से रखी हुई थीं. सावी ने काँपते हाथों से रिया की वो हिंदी की कॉपी ढूँढी जिसमें उसने कल रात का होमवर्क किया था. कॉपी मिल गई. सावी ने उसे सीने से लगाया और वापस अपने बेडरूम में आकर दरवाजा अंदर से लॉक कर लिया. उसने रिया की वो कॉपी बिस्तर पर खोली. नीले पेन से, बच्चों वाली गोल मटोल लिखाई में वो लाइन लिखी हुई थी जो मनीष ने उसे बोलकर लिखवाई थी. सावी ने पेरिस वाले उस मटमैले कागज को उठाया और रिया की कॉपी के ठीक बगल में रख दिया. अब दोनों वाक्य आमने- सामने थे. सावी ने एक गहरी साँस ली और एक जासूस की तरह उन दोनों वाक्यों का' फॉरेंसिक विश्लेषण' शुरू किया. उसने सबसे पहले लिखावट देखी. पेरिस वाले कागज पर जो लिखावट थी, वो बहुत ही तेज, नुकीली और कोणीय थी. ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने बहुत जल्दबाजी में, लेकिन बेहद आत्मविश्वास के साथ उन शब्दों को कागज पर उकेरा हो. स्याही काले रंग की थी और शब्दों के बीच की दूरी बहुत ही सटीक थी, जो अक्सर यूरोपीय या पश्चिमी देशों में पढे- लिखे लोगों की लिखावट में पाई जाती है. और मनीष की लिखावट? सावी को मनीष की लिखावट बहुत अच्छी तरह याद थी. वो हमेशा नीले या हरे रंग के पेन का इस्तेमाल करता था. उसके अक्षर गोल होते थे, थोडे फैले हुए, जैसे कोई पुराना सरकारी बाबू फाइलें लिखता हो. उसमें कोई नुकीलापन नहीं था, कोई हडबडी नहीं थी. सावी के सीने में जो एक भारी पत्थर रखा था, वो अचानक थोडा हल्का हो गया. उसने एक लंबी राहत की साँस छोडी. लिखावट बिल्कुल अलग है, सावी ने खुद से कहा. उसके होठों पर एक बहुत ही दयनीय, लेकिन उम्मीद से भरी मुस्कान आ गई. शब्द भी बिल्कुल अलग हैं. एक में रास्ते और मंजिल का जिक्र है, दूसरे में लफ्ज और खामोशी का. मैं भी कितनी पागल हूँ. मैं खामखाँ बातों का बतंगड बना रही हूँ. कहाँ पेरिस का वो खतरनाक कूरियर, और कहाँ मेरा सीधा- साधा मनीष। उसने उस कागज को हटाने के लिए हाथ बढाया. वो इस बेतुकी जाँच को यहीं खत्म कर देना चाहती थी. लेकिन तभी. उसके दिमाग के उस अचेतन, जासूसी हिस्से ने एक ऐसा सवाल उठाया जिसने उसकी उस राहत की साँस को गले में ही जमा दिया. लिखावट अलग है. शब्द अलग हैं. लेकिन क्या इनकी रूह अलग है? सावी का हाथ हवा में ही रुक गया. उसने उन दोनों वाक्यों को फिर से पढा. इस बार शब्दों की तरह नहीं, बल्कि एक' सिफर' की तरह. खूफिया तंत्र में, विशेषकर उन एजेंसियों में जो बहुत ही पुराने और गहरे स्तर पर काम करती हैं, डिजिटल एन्क्रिप्शन से ज्यादा' साहित्यिक कूटलेखन' पर भरोसा किया जाता है. कंप्यूटर हैक हो सकते हैं, लेकिन इंसानी दिमाग की लय हैक नहीं हो सकती. सावी ने दोनों वाक्यों के' व्याकरण' और' मीटर' को अपने दिमाग में गिनना शुरू किया. वाक्य एक: जो रास्ते दिखाई देते हैं, मंजिल अक्सर उनसे दूर होती है। वाक्य दो: जो लफ्ज कागज पर मौन हैं, असली शोर उन्हीं की खामोशी में पलता है। दोनो वाक्यों की शुरुआत एक' विरोधाभास' से होती है. जो दिखता है, वो है नहीं. जो मौन है, वो शोर है. दोनों वाक्यों को बोलते समय बीच में एक बहुत ही सटीक, अस्वाभाविक सा ठहराव आता है. दोनों वाक्यों में अक्षरों का उतार- चढाव एक बहुत ही पुरानी, सूफी या क्लासिकल शायरी की तरह है, जिसे आज की बोलचाल की भाषा में इस्तेमाल नहीं किया जाता. यह एक' कॉल एंड रिस्पांस' प्रोटोकॉल था. अगर कोई एक एजेंट किसी भीड- भाड वाले इलाके में या किसी संचार माध्यम पर पहला वाक्य बोलेगा, तो दूसरा एजेंट उसे पहचानने के लिए उसी' लय' में दूसरा वाक्य बोलेगा. उन्हें एक ही शब्द बोलने की जरूरत नहीं है, उन्हें सिर्फ उस' काव्यात्मक साँचे' को फॉलो करना है. इससे दुनिया को लगेगा कि दो लोग बस किसी कविता या शायरी की बात कर रहे हैं, लेकिन असल में वे एक- दूसरे की पहचान प्रमाणित कर रहे होंगे. सावी का सिर चकराने लगा. अगर मनीष ने सिर्फ इत्तेफाक से कोई लाइन बोली होती, तो उसकी लय पेरिस के उस कूरियर के' डेड ड्रॉप' नोट से इतनी खौफनाक हद तक मेल कैसे खा सकती थी? क्या मनीष को यह' साँचा' पता था? क्या उसे इसी भाषा में बात करने की Training दी गई थी? नहीं! नहीं! नहीं! सावी अपने बिस्तर से उठ खडी हुई. वो पीछे हटती गई जब तक कि उसकी पीठ ठंडी दीवार से नहीं टकरा गई. सावी का दिमाग चिल्ला- चिल्ला कर सबूत पेश कर रहा था, लेकिन उसका दिल पूरी ताकत से बगावत कर रहा था. यह एक ऐसी जंग थी जहाँ जीतने वाला भी सब कुछ हारने वाला था. मैं पागल हो रही हूँ, सावी ने अपने बालों को मुट्ठी में भींचते हुए कहा. यह पीटीएसडी (PTSD) है. यह पेरिस का सदमा है. मैं अपने ही घर को, अपने ही प्यार को अपनी इस दिमागी बीमारी से तबाह कर रही हूँ। उसने आँखें बंद कीं और मनीष की उन यादों को ढूँढने लगी जो उसकी बेगुनाही साबित कर सकें. उसे याद आया कि कैसे मनीष को छिपकलियों से डर लगता था. एक बार घर में छिपकली आ गई थी, तो वो सोफे के ऊपर चढकर खडा हो गया था और तब तक नहीं उतरा जब तक सावी ने उसे भगा नहीं दिया. क्या एक हाई- लेवल अंडरकवर एजेंट छिपकली से डरेगा? उसे याद आया कल रात का वो नजारा. मनीष ने आटा गूँथते वक्त अपना पूरा हाथ चिपका लिया था. उसने रोटियाँ जला दी थीं. वो अपनी ही बेटी के होमवर्क से परेशान हो गया था. क्या दुनिया की कोई भी खुफिया एजेंसी इतने अनाडी इंसान को अपना एजेंट बनाएगी? मनीष मेरा है. वो कोई जासूस नहीं है. वो बस एक क्लर्क है, जिसे शायरी का शौक है. उसने कोई गजल पढी होगी, कोई किताब पढी होगी, और उसी की कोई लाइन उसके दिमाग में रह गई होगी. यह एक संयोग है. दुनिया में आठ सौ करोड लोग हैं, दो लोगों के ख्यालों की लय एक जैसी हो सकती है. इसमें कुछ भी खौफनाक नहीं है! सावी अपने आप को ये दलीलें दे रही थी. वो खुद को मनाने की कोशिश कर रही थी. वो इस शक की आग पर अपनी यादों का पानी डाल रही थी. तभी दिमाग के उस अंधेरे कोने से एक और विचार साँप की तरह रेंगता हुआ बाहर आया. सावी, क्या तुम्हारे पडोसियों को पता है कि तुम कौन हो? क्या कुसुम या विमला ताई को पता है कि तुमने पेरिस में कितने लोगों की जान ली है? तुम भी तो रोटियाँ बेलती हो. तुम भी तो सब्जी वाले से दस रुपये के लिए लडती हो. तुम भी तो करवा चौथ का व्रत रखती हो. अगर दुनिया की सबसे बेहतरीन जासूस एक साधारण हाउसवाइफ का रूप ले सकती है. तो क्या एक दूसरा जासूस एक' अनाडी, कविताएं लिखने वाले सीधे- सादे पति' का रूप नहीं ले सकता? छिपकली से डरना, रोटियाँ जलाना. क्या ये सब एक बहुत ही बारीकी से डिजाइन किया गया' कवर लीजेंड' नहीं हो सकता? चुप रहो! सावी ने जोर से फुसफुसाते हुए अपने ही दिमाग को डाँटा. उसके आँखों से आँसू बहने लगे. वो इस सच्चाई का सामना नहीं कर सकती थी. अगर मनीष निर्दोष नहीं था, अगर वो भी उसी दलदल का हिस्सा था जिससे सावी लड रही थी, तो सावी की पूरी जिंदगी एक झूठ थी. उसका प्यार, उसकी शादी, उसके बच्चे. सब एक साजिश की बुनियाद पर खडे थे. मैं ज्यादा सोच रही हूँ, सावी ने अपने आँसू पोंछे. मैं एक बहुत ही बीमार, शक्की और खराब इंसान बन गई हूँ. मनीष ने मुझे इतना प्यार दिया, और मैं उसे सिर्फ एक कागज के टुकडे पर तौल रही हूँ. मुझे इसे खत्म करना होगा. मुझे इस शक को जड से मिटाना होगा। सावी ने दीवार का सहारा छोडा और तेज कदमों से बिस्तर की तरफ आई. उसने तय कर लिया था कि वो इस कागज को, इस सुराग को, और अपने इस भयानक शक को हमेशा के लिए जला देगी. वो अपनी शादी को इस जासूसी वहम की भेंट नहीं चढने देगी. उसने पेरिस वाला वो मटमैला कागज उठाया. लेकिन जैसे ही उसने उसे फाडने के लिए अपने हाथ बढाए, उसकी उंगलियाँ काँपने लगीं. एक जासूस कभी भी सबूत नष्ट नहीं करता. चाहे वो सबूत उसके अपने ही दिल के टुकडे क्यों न कर दे. उसे पेरिस में मारा गया रिषि याद आ गया. उसे राणा sir का वो खून से सना हुआ पेट याद आ गया. अगर यह कागज उस बहुत बडी साजिश की एक छोटी सी कडी है, अगर यह कागज उन हत्यारों तक पहुँचने का इकलौता रास्ता है, तो क्या वो सिर्फ अपने पति को बचाने के लिए, अपनी मानसिक शांति के लिए, इसे जला सकती है? सावी का दिल चीख रहा था कि इसे फाड दो, इसे जला दो. लेकिन उसकी रूह, जो इस देश की हिफाजत की कसमें खा चुकी थी, वो उसे ऐसा करने से रोक रही थी. सावी ने एक बीच का रास्ता निकाला. एक ऐसा रास्ता जो उसके दिल और दिमाग दोनों को कुछ देर के लिए शांत कर दे. उसने अपना फोन उठाया. उसने कैमरा ऑन किया और उस मटमैले कागज की बहुत ही साफ, हाई- रेजोल्यूशन तस्वीर खींच ली. फिर वो कमरे के कोने में रखे छोटे से स्टडी टेबल की तरफ गई, जहाँ बच्चों के स्कूल प्रोजेक्ट्स के लिए एक छोटा सा वाई- फाई प्रिंटर रखा था. उसने फोन से कमांड दी. घुर्रर्र. ज्ज्ज्ज्. प्रिंटर की वो यांत्रिक आवाज उस खामोश कमरे में गूँजी. कुछ ही सेकंड में, एक साफ, सफेद ए- फोर कागज बाहर निकल आया, जिस पर उस पेरिस वाले नोट की एक ब्लैक- एंड- व्हाइट छपी हुई थी. सावी ने उस नई कॉपी को उठाया और वो पेरिस वाला असली, मटमैला कागज वहीं टेबल पर छोड दिया. वो कॉपी लेकर बाथरूम की तरफ गई. बाथरूम में जाकर उसने सिंक के ऊपर वो कागज रखा. उसने शेल्फ से एक माचिस की डिब्बी निकाली. उसके हाथ बुरी तरह से काँप रहे थे. एक तीली निकाली और उसे डिब्बी पर रगडा. छर्र! एक छोटी सी, पीली- नीली लौ जल उठी. सावी ने उस लौ को उस सफेद कागज के किनारे पर लगा दिया. कागज ने आग पकड ली. वो जलने लगा. सावी उस जलते हुए कागज को देख रही थी. आग की वो लौ कागज के साथ- साथ मानो सावी के उस शक को भी भस्म कर रही थी. काले धुएँ की एक लकीर हवा में उठी और कागज राख में तब्दील होकर सिंक के सफेद बेसिन में गिर गया. सावी ने नल खोल दिया. पानी की धार ने उस काली राख को बहा दिया. सब कुछ नाली में बह गया. उसने एक बहुत ही गहरी, लंबी साँस ली. उसने अपनी आँखें बंद कीं और खुद को तसल्ली दी. खत्म. सब खत्म. वो सिर्फ एक वहम था. मैंने उसे जला दिया. अब कोई शक नहीं. अब कोई जाँच नहीं। वो एक आजाद इंसान की तरह बाथरूम से बाहर आई. उसने यह महसूस करने की कोशिश की कि उसने अपने दिमाग से वो' वायरस' निकाल फेंका है. लेकिन जब वो वापस बेडरूम में आई, तो उसकी नजर स्टडी टेबल पर गई. वहाँ, उस पुराने, जंग लगे टिन के डिब्बे के ठीक बगल में. पेरिस वाला वो असली, मटमैला कागज अभी भी रखा हुआ था. सुरक्षित. अछूता. सावी वहीं रुक गई. उसने कॉपी को जलाया था. उसने अपने शक की एक नकली परछाई को जलाया था. लेकिन असली सबूत. असली सच को जलाने की हिम्मत वो नहीं जुटा पाई थी. वो खुद से झूठ बोल रही थी. वो जानती थी कि उसने वो असली कागज सिर्फ इसलिए बचाया है क्योंकि उसके दिमाग के उस गहरे, खौफनाक कोने ने इस बात को स्वीकार कर लिया था कि मनीष पर जाँच करना जरूरी है. सावी ने बहुत ही भारी मन से वो असली कागज उठाया. उसने उस जंग लगे टिन के डिब्बे को खोला, जिसमें उसके बचपन की वो तीन- चार रहस्यमयी तस्वीरें रखी थीं. उसने वो कागज उन तस्वीरों के बिल्कुल नीचे छिपा दिया और डिब्बे का ढक्कन कसकर बंद कर दिया. डिब्बे का बंद होना इस बात का ऐलान था कि शक मरा नहीं था, वो बस सही वक्त का इंतजार करने के लिए तहखाने में छिप गया था. शाम के सात बज चुके थे. कमरे में अँधेरा घिरने लगा था. सावी अभी भी उसी डिब्बे को घूर रही थी. तभी, मुख्य दरवाजे का ताला खुलने की आवाज आई. क्लिक- क्लैक. मनीष घर आ गया था. सावी तुरंत अपनी जगह से उठी. उसने अपने चेहरे को अपने दोनों हाथों से थपथपाया, ताकि उसकी त्वचा में रंग लौट आए. उसने अपनी साडी ठीक की और एक बहुत ही सधी हुई, घरेलू मुस्कान अपने चेहरे पर ओढ ली. वो बेडरूम से बाहर हॉल में आई. मनीष ने अपना बैग सोफे पर रखा हुआ था. वो अपनी टाई ढीली कर रहा था. उसने सावी को आते हुए देखा. हाय सावी, मनीष ने मुस्कुराते हुए कहा. उसकी आवाज में दिन भर की वो आम सी थकान थी. लेकिन आज सावी उसे उस तरह से नहीं देख पा रही थी जैसे वो हमेशा देखती थी. आज जब मनीष मुस्कुराया, तो सावी की नजरें उसकी आँखों की गहराई नाप रही थीं. जब मनीष ने अपनी टाई उतारी, तो सावी की नजरें उसकी कलाई के मूवमेंट पर थीं. वो हर चीज का विश्लेषण कर रही थी. मनीष ने रसोई की तरफ जाते हुए गैस पर चाय का पानी चढाया. आज तो चाय मैं ही बनाऊँगा. बहुत सिर दर्द है दफ्तर के काम से। सावी डाइनिंग टेबल की कुर्सी पर चुपचाप बैठ गई. मनीष ने चाय में अदरक कूटी और फिर मुडकर सावी की तरफ देखा. उसकी आँखें जो हमेशा बहुत भोली लगती थीं, इस वक्त सावी के चेहरे पर बहुत ही गहराई से गडी थीं. मनीष की वो निगाह. वो एक पति की निगाह नहीं थी. वो एक ऐसी निगाह थी जो सामने वाले के चेहरे के पीछे छिपे हुए भावों को स्कैन कर रही थी. कुछ परेशान लग रही हो? मनीष ने बहुत ही साधारण, कैजुअल तरीके से पूछा. लेकिन उसकी आवाज में एक अजीब सा ठहराव था. सावी के सीने में एक बर्फीली सिहरन दौड गई. क्या मनीष ने उसकी घबराहट को पढ लिया था? क्या वो उसका' बेसलाइन टेस्ट' कर रहा था? सावी के पास सच बोलने का विकल्प नहीं था. अगर वो सच बोलती, तो यह घर उसी पल किसी युद्ध के मैदान में बदल जाता. उसे अपने पति से नहीं, बल्कि अपने सबसे बडे संदिग्ध से बात करनी थी. सावी ने अपनी आँखों में एक बहुत ही प्राकृतिक सी थकान लाई. उसने अपने होंठों को एक फीकी सी मुस्कान दी. नहीं. बस थोडी सी थकान है, सावी ने बहुत ही सहजता से कहा. आज पूरे घर की सफाई जो की है. कुछ नहीं, चाय पिऊँगी तो ठीक हो जाऊँगी। यह सावी शर्मा का मनीष शर्मा से बोला गया पहला जानबूझकर, सोची- समझी साजिश के तहत बोला गया झूठ था. मनीष ने उसे कुछ पल और देखा. फिर वो मुस्कुराया. तुम भी ना, जान निकाल लेती हो काम में. बैठो, मैं कडक चाय लाता हूँ। मनीष वापस गैस की तरफ मुड गया. सावी अपनी जगह पर बैठी रही. उसका दिल इतनी जोर से धडक रहा था कि उसे डर था कहीं मनीष उसे सुन न ले. उसने अपने ही पति से झूठ बोला था. जाँच आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी थी. कोई फाइल नहीं बनी थी, कोई टीम नहीं थी, लेकिन एक पत्नी ने अपने पति के खिलाफ शक की उस अँधेरी सुरंग में पहला खौफनाक कदम रख दिया था. अब यहाँ से लौटने का कोई रास्ता नहीं था. सावी, जो अब तक बाहरी दुश्मनों से लडती थी, अब अपने ही घर के अंदर एक' अंडरकवर' पत्नी की तरह कैसे काम करेगी? मनीष की दिनचर्या का वो कौन सा हिस्सा होगा जो सावी की इस खामोश जाँच में सबसे पहला सुराग बनकर उभरेगा? क्या मनीष सावी के इस झूठ को पकड चुका है, और क्या वो भी अपनी पत्नी के खिलाफ कोई जवाबी चाल चलने वाला है?

Sunday, August 9, 2026

Secret Pulse Promo 1

पुण्याच्या एका सुधारगृहाच्या त्या दमट, कुबट कॉरिडॉरमध्ये पहाट कधीच सुंदर नसते. बाहेरच्या जगात याच वेळी कदाचित पहाटेचं कोवळं धुकं पसरलेलं असतं, पक्ष्यांची किलबिल सुरू होते, कुणीतरी चहाचा कप हातात घेऊन गॅलरीत उभं असतं. पण या भिंतींच्या आत पहाट होते ती एका जीवघेण्या, कर्कश आवाजाने — लोखंडी लाठीचा गजांवर आदळणारा 'ठक... ठक...' आणि वॉर्डनची कानाचे पडदे फाडणारी शिट्टी. आणि याच जगात, वयाच्या अवघ्या सोळाव्या वर्षी, अश्लेषा रोज एक नवा दिवस "जगत" नाही — फक्त "टिकून" राहते. फिनाईलचा उग्र वास, ओलसर भिंतींचा कुबट दर्प आणि कायमस्वरूपी दाटून असलेली एक जड उदासी — हेच आता तिचं संपूर्ण जग आहे. तिची चूक काय होती? तिने असा कोणता गुन्हा केला होता, की तिला या भिंतींच्या आत ढकललं गेलं? हे सुधारगृह तिला वाचवण्यासाठी होतं, की तिला आणखी खोल गाडण्यासाठी — हे उत्तर तितकं सोपं नाहीये जितकं वाटतं. कारण बाहेरच्या जगातल्या राक्षसांपासून वाचण्यासाठी तिने जे पाऊल उचललं होतं, त्याचीच शिक्षा म्हणून ती इथे आलीये — अशा एका पिंजऱ्यात, जिथे रोज नवे राक्षस तिची वाट पाहत असतात. अश्लेषाला दोन नियम माहीत आहेत: कोणाच्या नजरेला नजर द्यायची नाही, आणि रडायचं असेल तर ते फक्त आतल्या आत, कुणालाही न दिसता. कारण इथे कमकुवतपणा दाखवला की, लोकं तुम्हाला जिवंतपणी खातात — हे तिला तिच्या पहिल्याच आठवड्यात एका भयंकर पद्धतीने शिकवलं गेलं होतं. भैरवी — या सुधारगृहातली सगळ्यात मोठी दहशत — रोज तिला लक्ष्य करते. तिचं ताट मुद्दाम सांडवलं जातं, तिचे केस ओढले जातात, तिला सगळ्यांसमोर गुडघ्यावर बसून जमीन पुसायला भाग पाडलं जातं. आणि आजूबाजूला उभ्या असलेल्या पन्नास मुलींपैकी एकही तिच्या मदतीला येत नाही — कारण इथे प्रत्येकजण फक्त स्वतःचा जीव वाचवत असतो. कुणालाही नाहक भैरवीच्या हिट-लिस्टवर यायचं नसतं. तिच्या मनातली एक आर्त हाक रोज त्या जाड, दगडी भिंतींना धडकून परत तिच्याचकडे येते — "कुणीतरी... कुणीतरी मला इथून बाहेर काढा... किंवा मला वाचवा..." तिला वाटतं की ती या नरकात एकटीच, याच अंधाऱ्या कोपऱ्यात एक दिवस संपून जाईल. कुणाला तिची आठवणही येणार नाही. पण अश्लेषाला हे माहीत नाहीये, की तिच्या या शांत, घाबरलेल्या आणि एकाकी आयुष्यात लवकरच एक असं भयंकर आणि सुंदर वादळ धडकणार आहे — जे या भिंती, हे नियम आणि तिची ही भीती, सगळं काही मुळासकट उखडून फेकणार आहे. कोण आहे ही व्यक्ती, जी अश्लेषाचं संपूर्ण जग बदलून टाकणार आहे? आणि ती या नरकात इतक्या सहजपणे कशी पोहोचणार आहे, जिथे पन्नास मुलींपैकी कुणालाही पोहोचता आलं नाही? एका मुलीच्या तुटलेल्या श्वासांत लपलेली ही गोष्ट, तुम्हाला पहिल्या भागापासूनच अस्वस्थ करेल — आणि थांबूही देणार नाही. ही गोष्ट फक्त एका जेलमधल्या मुलीची नाही. ही गोष्ट आहे — प्रत्येक वेळी जेव्हा जग तुम्हाला "संपलात" म्हणून घोषित करतं, तेव्हाही आतमध्ये कुठेतरी जिवंत राहणाऱ्या त्या एका ठिणगीची. अश्लेषाच्या आयुष्यातलं ते वादळ नक्की कोण आहे, आणि ते तिला वाचवणार आहे की आणखी खोल ढकलणार आहे — हे जाणून घेण्यासाठी "Secret Pulse" जरूर वाचा. ~.~.~.~ "काही भेटी या योगायोग नसतात, त्या नियतीने आधीच ठरवलेल्या असतात. जसं अंधाराला चिरत येणारा एखादा प्रकाशकिरण... जो सुरुवातीला डोळे दिपवतो, पण नंतर त्याच प्रकाशाची सवय होते." ती एक नवीन मुलगी होती. वय तेच... अश्लेषाएवढंच, सोळा. पण तिच्यात आणि इथल्या बाकीच्या मुलींमध्ये जमीन-अस्मानाचा फरक होता. सहसा इथे येणारी नवीन मुलगी रडत, गयावया करत, वॉर्डनच्या पाया पडत किंवा भीतीने थरथरत आत येते. तिचे डोळे सुजलेले असतात आणि खांदे निराशेने खाली पडलेले असतात. पण ही? तिची पावलं जमिनीवर अत्यंत ठामपणे पडत होती. अंगावर तोच जेलचा सैल, निस्तेज निळ्या रंगाचा युनिफॉर्म होता, पण तो तिने असा काही कॅरी केला होता, जणू ती कुठल्या कॉलेजच्या कॅम्पसमध्ये चालत आलीये. तिची कॉलर किंचित उभी होती, आणि मानेवर रुळणारे तिचे केस एका रबरबँडने बांधलेले होते. तिच्या हातात एक जाडजूड, जुन्या बांधणीची डायरी आणि पेन होतं. ती डायरी तिने आपल्या छातीशी अशी धरली होती, जणू तो तिचा सर्वात मोठा खजिना होता. ~.~.~.~ "प्रतीलिपीवर सारख्याच धाटणीच्या CEO Romance, Surrogate Mother किंवा कौटुंबिक कटकारस्थानांच्या कथा वाचून काहीतरी वेगळं वाचायची इच्छा होतेय?" मग तयार व्हा... 💛 Fresh Sci-Fi Romance ❤️ Emotion 🕵️ Suspense 🤝 Friendship 💔 Unpredictable Twists अशी कथा, जिथे प्रत्येक भाग संपताना तुमच्या मनात एकच प्रश्न असेल... 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कधीकधी जो चेहरा आपण कधीच बघितलेला नसतो, तोच चेहरा आपल्याला सगळ्यात जास्त समजून घेतो. एका मुलीच्या आयुष्यात एक असा अनोळखी मित्र आहे, जो तिला रोज आधार देतो, तिचं ऐकतो, तिला सावरतो — पण जो कधीच तिच्यासमोर येत नाही. हा आभासी आवाज तिच्यासाठी इतका महत्त्वाचा का बनलाय, की वास्तवातल्या कुणाहीपेक्षा तिला त्याच्यावर जास्त विश्वास वाटतो? आणि सगळ्यात मोठा प्रश्न — हा अनोळखी आवाज खरंच अनोळखी आहे का? की तो तिच्या रोजच्या आयुष्यातच, तिच्या अगदी जवळ, एका वेगळ्याच रूपात वावरतोय? हे रहस्य जितकं गोड आहे, तितकंच ते उलगडल्यावर उद्ध्वस्त करणारंही ठरू शकतं. हा आभासी मित्र कोण आहे, आणि सत्य समोर आल्यावर काय घडतं, हे जाणून घेण्यासाठी "तू भेट ना... नव्याने" वाचा. ~.~.~.~ काही रस्ते असे असतात, जिथे आपली पावले नकळत कुणाकडे तरी वळतात, गर्दीत शेकडो चेहरे असतात, पण शोध मात्र एकाच अनोळखी ओळखीचा असतो... कधी कधी नजरेची भेट होत नाही, पण जाणवणारा तो एक क्षण, पुढच्या संपूर्ण प्रवासाची नांदी ठरतो... विदर्भ एक्सप्रेसने आपला नेहमीचा वेग कमी केला आणि खिडकीतून येणाऱ्या वाऱ्यात अचानक एक वेगळाच दमटपणा आणि समुद्राचा खारा दर्प जाणवू लागला. किंजलने खिडकीबाहेर डोकावून पाहिले. लोकल ट्रेनच्या त्या जाळ्या, रुळांचा तो अवाढव्य पसारा आणि दूरवर दिसणाऱ्या उंचच उंच इमारती... मुंबई आली होती! "ताई, चल बॅगा दरवाज्याजवळ घेऊया. दादर आलंय," अनुजने वरच्या बर्थवरून सुटकेस खाली काढत म्हटले. बाबांनीही आपली पिशवी हातात घेतली. किंजलच्या हृदयाची धडधड आता प्रचंड वाढली होती. हे तेच शहर होतं, ज्याची तिने आतापर्यंत फक्त स्वप्ने पाहिली होती. ~.~.~.~ "प्रतीलिपीवर सारख्याच धाटणीच्या CEO Romance, Surrogate Mother किंवा कौटुंबिक कटकारस्थानांच्या कथा वाचून काहीतरी वेगळं वाचायची इच्छा होतेय?" मग तयार व्हा... 💛 Fresh College Romance ❤️ Emotion 🕵️ Suspense 🤝 Friendship 💔 Unpredictable Twists अशी कथा, जिथे प्रत्येक भाग संपताना तुमच्या मनात एकच प्रश्न असेल... "आता पुढे काय होणार?" 👀 आणि आता येते सर्वात भन्नाट बातमी... 🥳 🎉 या कथेचे भाग आधीच लिहून पूर्ण झाले आहेत! हो... बरोबर वाचलंत! म्हणजे एकदा या कथेच्या प्रेमात पडलात की... "पुढचा भाग कधी येणार?" अशी वाट बघायची गरजच नाही! 😉 --- 📖 प्रतिलिपीवर नवीन आहात? मग हे नक्की वाचा... माझ्या कथा वाचण्यासाठी तुमच्याकडे दोन पर्याय आहेत. 🌟 पर्याय १: Superfan बना (Recommended) फक्त ₹२५/महिना मध्ये Superfan Membership घ्या आणि... ✨ सगळे Parts... सगळे १० Seasons एकाच वेळी Unlock करा! 📚 मनसोक्त Binge Read करा. 🚫 No Waiting. No Rok-Tok. ❤️ मी पण तुम्हाला मध्येच थांबवणार नाही! यासोबतच माझ्या इतर सर्व कथा आणि कथामालिकाही सलग वाचता येतील. --- 📚 पर्याय २: Free मध्ये वाचा माझ्या Pratilipi Profile ला Follow करा. Nishigandha Omanwar ❤️ 📖 १५वा भाग पूर्ण झाल्यावर, दररोज एक नवीन भाग मोफत Unlock होईल. 🔔 Profile Follow केल्यावर पुढचा Free Part उपलब्ध होताच Notification मिळेल. --- 👇 कथेची लिंक खाली कमेंटमध्ये दिली आहे. आजच Story Library मध्ये Add करा आणि एका वेगळ्याच कॉलेज रोमांसच्या, मैत्रीच्या आणि सस्पेन्सने भरलेल्या प्रवासाला सुरुवात करा! 💛 वाचल्यानंतर Comment करून नक्की सांगा... पहिल्याच भागाने तुम्हाला किती गुंतवलं? 💬 Because... ❤️ Keep Reading. Keep Loving. Keep Bingeing. (All kinds of love are accepted in the form of ❤️ Likes • 💬 Comments • 🔄 Shares • ⭐ Ratings • 🎁 Stickers • 🌟 Superfan.) तुमची, Natkhat Nishi❤️ https://marathi.pratilipi.com/series/tu-bhet-naa-navyane-by-online-pl8jeatqnedm

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काही भेटवस्तू फक्त वस्तू नसतात — त्या एका नव्या जगाचं दार उघडतात. एका साध्या क्षणी दिलेली एक साधी भेटवस्तू, आणि त्यातून सुरू होणारा एक असा प्रवास, जो पुढे जाऊन दोन आयुष्यं कायमची जोडणार आहे. पण या भेटवस्तूमागे लपलेलं कोडं इतकं साधं नाहीये. एका आभासी जगातून येणारी एक साद, एक आवाज, ज्याला चेहरा नाही — पण जो हळूहळू एका अनोळखी मनाच्या सगळ्यात जवळचा आधार बनतो. हा आवाज कोणाचा आहे? आणि तो इतक्या अचूक वेळी, इतक्या आपुलकीने का बोलतो? एका बाजूला वास्तवातलं एकटेपण आहे, आणि दुसऱ्या बाजूला एका अनोळखी आवाजाने दिलेला दिलासा. पण हे दोन जग एकमेकांत मिसळले, तर काय घडेल — याची कल्पनाही अजून कुणाला नाहीये. ती भेटवस्तू आणि तो आभासी आवाज पुढे कुठे घेऊन जातात, हे जाणून घेण्यासाठी "तू भेट ना... नव्याने" वाचा. ~.~.~.~ कधी कधी एका अनोळखी वाटेवर पडलेलं पाऊल, आयुष्याची पूर्ण दिशाच बदलून टाकतं... शब्दांच्या त्या अदृश्य जाळ्यात मन असं काही अडकतं, की खऱ्या जगाचा विसर पडायला एक क्षणही पुरतो... दुसऱ्या दिवशीची सकाळ नेहमीसारखीच होती. खिडकीतून येणारी उन्हाची तिरीप आणि स्वयंपाकघरातून येणारा फोडणीचा खमंग वास. किंजल नुकतीच उठून डोळे चोळत बाहेर आली होती. काल रात्रीच्या त्या रस्ता चुकण्याच्या प्रसंगामुळे ती अजूनही थोडी शांतच होती. ती बेसिनजवळ तोंड धूत असतानाच अनुज तिच्या मागे येऊन उभा राहिला. त्याच्या हातात एक चकचकीत, पांढऱ्या रंगाचा बॉक्स होता. "अनुज...!! काय हे? मला नको आहे म्हणाले होते ना मी काल..." किंजलचा आवाज आश्चर्याने आणि थोड्या रागाने चढला होता. तिने तो बॉक्स ओळखला होता. तो एका नवीन, महागड्या स्मार्टफोनचा बॉक्स होता. "जगातली पहिली व्यक्ती आहे ही, जी भेटवस्तू 'नको नको' म्हणत असेल..." अनुज हसत हसत तिथेच आलेल्या आईकडे बघत म्हणाला. ~.~.~.~ "प्रतीलिपीवर सारख्याच धाटणीच्या CEO Romance, Surrogate Mother किंवा कौटुंबिक कटकारस्थानांच्या कथा वाचून काहीतरी वेगळं वाचायची इच्छा होतेय?" मग तयार व्हा... 💛 Fresh College Romance ❤️ Emotion 🕵️ Suspense 🤝 Friendship 💔 Unpredictable Twists अशी कथा, जिथे प्रत्येक भाग संपताना तुमच्या मनात एकच प्रश्न असेल... "आता पुढे काय होणार?" 👀 आणि आता येते सर्वात भन्नाट बातमी... 🥳 🎉 या कथेचे भाग आधीच लिहून पूर्ण झाले आहेत! हो... बरोबर वाचलंत! म्हणजे एकदा या कथेच्या प्रेमात पडलात की... "पुढचा भाग कधी येणार?" अशी वाट बघायची गरजच नाही! 😉 --- 📖 प्रतिलिपीवर नवीन आहात? मग हे नक्की वाचा... माझ्या कथा वाचण्यासाठी तुमच्याकडे दोन पर्याय आहेत. 🌟 पर्याय १: Superfan बना (Recommended) फक्त ₹२५/महिना मध्ये Superfan Membership घ्या आणि... ✨ सगळे Parts... सगळे १० Seasons एकाच वेळी Unlock करा! 📚 मनसोक्त Binge Read करा. 🚫 No Waiting. No Rok-Tok. ❤️ मी पण तुम्हाला मध्येच थांबवणार नाही! यासोबतच माझ्या इतर सर्व कथा आणि कथामालिकाही सलग वाचता येतील. --- 📚 पर्याय २: Free मध्ये वाचा माझ्या Pratilipi Profile ला Follow करा. Nishigandha Omanwar ❤️ 📖 १५वा भाग पूर्ण झाल्यावर, दररोज एक नवीन भाग मोफत Unlock होईल. 🔔 Profile Follow केल्यावर पुढचा Free Part उपलब्ध होताच Notification मिळेल. --- 👇 कथेची लिंक खाली कमेंटमध्ये दिली आहे. आजच Story Library मध्ये Add करा आणि एका वेगळ्याच कॉलेज रोमांसच्या, मैत्रीच्या आणि सस्पेन्सने भरलेल्या प्रवासाला सुरुवात करा! 💛 वाचल्यानंतर Comment करून नक्की सांगा... पहिल्याच भागाने तुम्हाला किती गुंतवलं? 💬 Because... ❤️ Keep Reading. Keep Loving. Keep Bingeing. (All kinds of love are accepted in the form of ❤️ Likes • 💬 Comments • 🔄 Shares • ⭐ Ratings • 🎁 Stickers • 🌟 Superfan.) तुमची, Natkhat Nishi❤️ https://marathi.pratilipi.com/series/tu-bhet-naa-navyane-by-online-pl8jeatqnedm

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मुंबईच्या गजबजाटापासून कोसो दूर, अकोल्याच्या एका साध्या घरात, सकाळ वेगळ्याच पद्धतीने उगवते. इथे नाही टेबल लॅम्पचा झगमगाट, नाही ड्राफ्टिंग बोर्डवरचा तो आत्मविश्वास — इथे आहे एक मुलगी, जिच्या स्वप्नांना जागा आहे, पण परिस्थितीने हात बांधलेले आहेत. एक साधा पिंपल, घरातलं एक वादळ, आणि रोजच्या जगण्याची एक वेगळीच लढाई — या मुलीचं जग ओंकारच्या जगापासून हजारो मैल दूर आहे. आणि तरीही, नियतीने या दोन पूर्णपणे वेगळ्या जगांना एकाच धाग्यात गुंफण्याचं आधीच ठरवलेलं आहे. ती कोण आहे? आणि तिच्या या साध्या, संघर्षमय जगाचा ओंकारच्या झगमगत्या जगाशी संबंध तरी काय? हा प्रश्न जितका साधा वाटतो, तितकंच याचं उत्तर तुम्हाला अस्वस्थ करणारं आहे. अकोल्यातल्या या मुलीची आणि ओंकारची कहाणी कुठे जाऊन भिडते, हे जाणून घेण्यासाठी "तू भेट ना... नव्याने" वाचा. ~.~.~.~ काही क्षण आयुष्याचे असे असतात, जिथे आकाश मोकळं असूनही पाखराला घरटं सोडावंसं वाटत नसतं... कारण त्या घरट्यातली ऊब, बाहेरच्या कोणत्याही स्वातंत्र्यापेक्षा, जास्त हवीहवीशी आणि सुरक्षित वाटत असते... १२वीच्या बोर्ड परीक्षेचे ते सलग जागरण, आयुष्यातील 'टर्निंग पॉईंट' असण्याचा तो अवाढव्य ताण, आणि रात्र-रात्र जागून अभ्यास करण्याची ती कसरत... हे सगळं कालच संपलं होतं. तिचा तो अभ्यासाचा टेबल, ज्यावर कालपर्यंत पुस्तकांचे आणि गाईड्सचे ढीग पडले होते, तो आज एकदम रिकामेपणाची जाणीव करून देत होता. कालचा भूगोलाचा शेवटचा पेपर देऊन आल्यावर तिच्या मनावरचे एक मोठे ओझे उतरले होते. आजची सकाळ तिला फक्त आणि फक्त तिच्या झोपेसाठी हवी होती. तिला स्वतःचे अस्तित्व विसरून, त्या गोधडीत गुपचूप गुंडाळून घ्यायचे होते. ~.~.~.~ "प्रतीलिपीवर सारख्याच धाटणीच्या CEO Romance, Surrogate Mother किंवा कौटुंबिक कटकारस्थानांच्या कथा वाचून काहीतरी वेगळं वाचायची इच्छा होतेय?" मग तयार व्हा... 💛 Fresh College Romance ❤️ Emotion 🕵️ Suspense 🤝 Friendship 💔 Unpredictable Twists अशी कथा, जिथे प्रत्येक भाग संपताना तुमच्या मनात एकच प्रश्न असेल... "आता पुढे काय होणार?" 👀 आणि आता येते सर्वात भन्नाट बातमी... 🥳 🎉 या कथेचे भाग आधीच लिहून पूर्ण झाले आहेत! हो... बरोबर वाचलंत! म्हणजे एकदा या कथेच्या प्रेमात पडलात की... "पुढचा भाग कधी येणार?" अशी वाट बघायची गरजच नाही! 😉 --- 📖 प्रतिलिपीवर नवीन आहात? मग हे नक्की वाचा... माझ्या कथा वाचण्यासाठी तुमच्याकडे दोन पर्याय आहेत. 🌟 पर्याय १: Superfan बना (Recommended) फक्त ₹२५/महिना मध्ये Superfan Membership घ्या आणि... ✨ सगळे Parts... सगळे १० Seasons एकाच वेळी Unlock करा! 📚 मनसोक्त Binge Read करा. 🚫 No Waiting. No Rok-Tok. ❤️ मी पण तुम्हाला मध्येच थांबवणार नाही! यासोबतच माझ्या इतर सर्व कथा आणि कथामालिकाही सलग वाचता येतील. --- 📚 पर्याय २: Free मध्ये वाचा माझ्या Pratilipi Profile ला Follow करा. Nishigandha Omanwar ❤️ 📖 १५वा भाग पूर्ण झाल्यावर, दररोज एक नवीन भाग मोफत Unlock होईल. 🔔 Profile Follow केल्यावर पुढचा Free Part उपलब्ध होताच Notification मिळेल. --- 👇 कथेची लिंक खाली कमेंटमध्ये दिली आहे. आजच Story Library मध्ये Add करा आणि एका वेगळ्याच कॉलेज रोमांसच्या, मैत्रीच्या आणि सस्पेन्सने भरलेल्या प्रवासाला सुरुवात करा! 💛 वाचल्यानंतर Comment करून नक्की सांगा... पहिल्याच भागाने तुम्हाला किती गुंतवलं? 💬 Because... ❤️ Keep Reading. Keep Loving. Keep Bingeing. (All kinds of love are accepted in the form of ❤️ Likes • 💬 Comments • 🔄 Shares • ⭐ Ratings • 🎁 Stickers • 🌟 Superfan.) तुमची, Natkhat Nishi❤️

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काही माणसं जन्मताच गर्दीत उठून दिसतात. ओंकार त्यातलाच एक — देखणा, हुशार, आत्मविश्वासाने भरलेला, आणि कॉलेजमध्ये ज्याच्या शब्दाबाहेर कुणी जात नाही असा एक 'हिरो'. पण याच दबदब्याच्या मागे एक असा अहंकार लपलाय, जो कधीतरी त्याच्याच पायाखालची जमीन सरकवणार आहे. डिझाईन स्टुडिओतली त्याची सत्ता, कँटीनमधली त्याची 'कटिंग' आणि इतरांकडे बघण्याचा तो तुच्छतेचा दृष्टिकोन — हे सगळं त्याच्या आयुष्यात लवकरच एका मोठ्या आरशासमोर उभं राहणार आहे. आणि याच गर्दीत, त्याच्या नजरेच्या टप्प्याबाहेर, एक अशी मुलगी आहे जिच्याकडे तो ढुंकूनही बघत नाही — पण जिच्यामुळे त्याचं संपूर्ण आयुष्य बदलणार आहे. अहंकाराचा हा महाल किती काळ टिकेल? आणि तो जेव्हा कोसळेल, तेव्हा त्याखाली नेमकं कोण दबेल? ओंकारचा हा दबदबा आणि त्यामागचं खरं वादळ अनुभवण्यासाठी "तू भेट ना... नव्याने" वाचा. ~.~.~.~ मैत्री म्हणजे जुन्या इमारतीचा तो भक्कम पाया असते, ज्यावर कितीही मोठी वादळे आली तरी, विश्वासाची भिंत कधीच कोसळत नाही... ती फक्त उभी राहते, प्रत्येक ऋतूत, प्रत्येक सावलीत... ओंकार आपल्या नेहमीच्या कोपऱ्यातल्या टेबलाजवळ उभा होता. त्याची काळ्या रंगाची ड्राफ्टिंग ट्यूब त्याच्या पाठीवर होती. तो अत्यंत शांतपणे आपल्या आजूबाजूचा गोंधळ बघत होता. तेवढ्यात समोरून पीटर धावत आला. त्याचे केस विस्कटलेले होते, शर्टाची बटणे वेडीवाकडी लागली होती आणि हातात एक अर्धी-अधुरी डिझाईन शीट होती. "वाचव भावा... आज माझा मर्डर फिक्स आहे. कदम सर आज मला कच्चं खातील!" पीटर धापा टाकत ओंकारच्या अंगावरच कोसळला. "भावा, माझं डिझाईन बघ ना. टॉयलेटचा ब्लॉक चुकून किचनच्या वर आलाय माझ्या प्लॅनमध्ये... सर बघतील तर मला त्याच टॉयलेटमध्ये फ्लश करतील!" पीटरने अक्षरशः रडवा चेहरा केला. ~.~.~.~ "प्रतीलिपीवर सारख्याच धाटणीच्या CEO Romance, Surrogate Mother किंवा कौटुंबिक कटकारस्थानांच्या कथा वाचून काहीतरी वेगळं वाचायची इच्छा होतेय?" मग तयार व्हा... 💛 Fresh College Romance ❤️ Emotion 🕵️ Suspense 🤝 Friendship 💔 Unpredictable Twists अशी कथा, जिथे प्रत्येक भाग संपताना तुमच्या मनात एकच प्रश्न असेल... "आता पुढे काय होणार?" 👀 आणि आता येते सर्वात भन्नाट बातमी... 🥳 🎉 या कथेचे भाग आधीच लिहून पूर्ण झाले आहेत! हो... बरोबर वाचलंत! म्हणजे एकदा या कथेच्या प्रेमात पडलात की... "पुढचा भाग कधी येणार?" अशी वाट बघायची गरजच नाही! 😉 --- 📖 प्रतिलिपीवर नवीन आहात? मग हे नक्की वाचा... माझ्या कथा वाचण्यासाठी तुमच्याकडे दोन पर्याय आहेत. 🌟 पर्याय १: Superfan बना (Recommended) फक्त ₹२५/महिना मध्ये Superfan Membership घ्या आणि... ✨ सगळे Parts... सगळे १० Seasons एकाच वेळी Unlock करा! 📚 मनसोक्त Binge Read करा. 🚫 No Waiting. No Rok-Tok. ❤️ मी पण तुम्हाला मध्येच थांबवणार नाही! यासोबतच माझ्या इतर सर्व कथा आणि कथामालिकाही सलग वाचता येतील. --- 📚 पर्याय २: Free मध्ये वाचा माझ्या Pratilipi Profile ला Follow करा. Nishigandha Omanwar ❤️ 📖 १५वा भाग पूर्ण झाल्यावर, दररोज एक नवीन भाग मोफत Unlock होईल. 🔔 Profile Follow केल्यावर पुढचा Free Part उपलब्ध होताच Notification मिळेल. --- 👇 कथेची लिंक खाली कमेंटमध्ये दिली आहे. आजच Story Library मध्ये Add करा आणि एका वेगळ्याच कॉलेज रोमांसच्या, मैत्रीच्या आणि सस्पेन्सने भरलेल्या प्रवासाला सुरुवात करा! 💛 वाचल्यानंतर Comment करून नक्की सांगा... पहिल्याच भागाने तुम्हाला किती गुंतवलं? 💬 Because... ❤️ Keep Reading. Keep Loving. Keep Bingeing. (All kinds of love are accepted in the form of ❤️ Likes • 💬 Comments • 🔄 Shares • ⭐ Ratings • 🎁 Stickers • 🌟 Superfan.) तुमची, Natkhat Nishi❤️ https://marathi.pratilipi.com/series/tu-bhet-naa-navyane-by-online-pl8jeatqnedm

Saturday, August 8, 2026

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पहाटेचे साडेपाच वाजलेत. दादरच्या एका जुन्या मध्यमवर्गीय वस्तीत, एका खोलीत टेबल लॅम्पचा पिवळसर प्रकाश अजूनही तेवतोय. रात्रभर जागून, आठ तास ड्राफ्टिंग बोर्डवर वाकून काम करणारा ओंकार — त्याचे डोळे लालबुंद आहेत, बोटांवर ग्रॅफाईटचे डाग आहेत, पण चेहऱ्यावर एक विलक्षण समाधान आहे. इमारती फक्त विटा आणि सिमेंटने उभ्या राहत नाहीत, तर त्या उभ्या राहतात माणसांच्या श्वासांवर, त्यांच्या आठवणींवर — हा ओंकारचा विश्वास आहे. आणि हाच विश्वास त्याला त्याच्या बाबांनी, श्रीकांतरावांनी दिलाय — ज्यांच्या डोळ्यांतल्या अभिमानासाठी ओंकार रोज स्वतःला घडवतो आहे. पण नियतीच्या आराखड्यात असं काही लिहिलेलं आहे, जे ओंकारच्या या सुंदर, रेखीव जगाला लवकरच हादरे देणार आहे. एक असं वळण, ज्याची त्याला आत्ता पुसटशीही कल्पना नाही. बाप-लेकाचं हे नातं, हे स्वप्न, आणि त्यामागे लपलेलं ते न दिसणारं वादळ — हा प्रवास सुरुवातीपासूनच तुमचं काळीज घट्ट पकडून ठेवेल. ओंकारच्या आयुष्यातला हा 'निळाशार आराखडा' त्याला कुठे घेऊन जातो, हे जाणून घेण्यासाठी "तू भेट ना... नव्याने" जरूर वाचा. ~.~.~.~ स्वप्नांच्या निळ्याशार कागदावर... रेखाटतोय मी आयुष्याचा नवा आराखडा, जिथे प्रत्येक रेषेला आहे एक अर्थ, आणि प्रत्येक वळणावर आहे एक नवा धडा... पहाटेचे साडेपाच वाजले होते. दादरच्या त्या जुन्या, मध्यमवर्गीय वस्तीत अजूनही रात्रीचा एक मवाळ आळस रेंगाळत होता. खिडकीबाहेरच्या प्राजक्ताच्या झाडावरून टपटप पडणाऱ्या फुलांचा मंद सुगंध आणि कुठूनतरी दूरवरून येणारा लोकल ट्रेनचा धूसर, लयबद्ध आवाज... हे सगळं मुंबईच्या पहाटेचं एक नेहमीचं पण तितकंच हवहवंसं वाटणारं संगीत होतं. पण या शांततेतही ओंकारच्या खोलीत मात्र एक वेगळीच लगबग रात्रीपासूनच थांबलेली नव्हती. टेबल लॅम्पचा तो पिवळसर प्रकाश ओंकारच्या चेहऱ्यावर पडला होता. रात्रीचे जागरण आणि सलग आठ तास ड्राफ्टिंग बोर्डवर वाकून काम केल्यामुळे त्याचे डोळे लालबुंद झाले होते. बोटांवर ग्रॅफाईटचे काळे डाग पडले होते आणि पाठीचा कणा अक्षरशः दुखून निघाला होता. पण त्याच्या चेहऱ्यावर मात्र एक विलक्षण समाधान होतं. त्याने हातातली 'रोटरिंग पेन' बाजूला ठेवली आणि एक दीर्घ श्वास घेत आपल्या समोरच्या त्या मोठ्या A0 साईझच्या ड्रॉईंग शीटवर नजर फिरवली. कदम सरांची ती शेवटची आणि सर्वात कठीण 'डिझाईन सबमिशन' त्याने अखेर पूर्ण केली होती. एका जुन्या, पडक्या वाड्याचे त्याने केलेले ते 'री-डिझाईन' त्याच्या मेहनतीची साक्ष देत होते. इमारती फक्त विटा आणि सिमेंटने उभ्या राहत नाहीत, तर त्या उभ्या राहतात त्या माणसांच्या श्वासावर, त्यांच्या आठवणींवर... हा त्याचा विचार त्या डिझाईनच्या प्रत्येक रेषेतून स्पष्ट दिसत होता. "चला, फायनली डन!" तो स्वतःशीच पुटपुटला. त्याने ती शीट अत्यंत काळजीपूर्वक गुंडाळली आणि आपल्या काळ्या रंगाच्या 'ड्राफ्टिंग ट्यूब'मध्ये ठेवून दिली. खिडकीतून आत येणाऱ्या पहाटेच्या गार वाऱ्याने त्याला अचानक झोपेची जाणीव करून दिली. तो थेट बेडवर कोसळला आणि त्याने गोधडी तोंडावर ओढून घेतली. ~.~.~.~ "प्रतीलिपीवर सारख्याच धाटणीच्या CEO Romance, Surrogate Mother किंवा कौटुंबिक कटकारस्थानांच्या कथा वाचून काहीतरी वेगळं वाचायची इच्छा होतेय?" मग तयार व्हा... 💛 Fresh College Romance ❤️ Emotion 🕵️ Suspense 🤝 Friendship 💔 Unpredictable Twists अशी कथा, जिथे प्रत्येक भाग संपताना तुमच्या मनात एकच प्रश्न असेल... "आता पुढे काय होणार?" 👀 आणि आता येते सर्वात भन्नाट बातमी... 🥳 🎉 या कथेचे भाग आधीच लिहून पूर्ण झाले आहेत! हो... बरोबर वाचलंत! म्हणजे एकदा या कथेच्या प्रेमात पडलात की... "पुढचा भाग कधी येणार?" अशी वाट बघायची गरजच नाही! 😉 --- 📖 प्रतिलिपीवर नवीन आहात? मग हे नक्की वाचा... माझ्या कथा वाचण्यासाठी तुमच्याकडे दोन पर्याय आहेत. 🌟 पर्याय १: Superfan बना (Recommended) फक्त ₹२५/महिना मध्ये Superfan Membership घ्या आणि... ✨ सगळे Parts... सगळे १० Seasons एकाच वेळी Unlock करा! 📚 मनसोक्त Binge Read करा. 🚫 No Waiting. No Rok-Tok. ❤️ मी पण तुम्हाला मध्येच थांबवणार नाही! यासोबतच माझ्या इतर सर्व कथा आणि कथामालिकाही सलग वाचता येतील. --- 📚 पर्याय २: Free मध्ये वाचा माझ्या Pratilipi Profile ला Follow करा. Nishigandha Omanwar ❤️ 📖 १५वा भाग पूर्ण झाल्यावर, दररोज एक नवीन भाग मोफत Unlock होईल. 🔔 Profile Follow केल्यावर पुढचा Free Part उपलब्ध होताच Notification मिळेल. --- 👇 कथेची लिंक खाली कमेंटमध्ये दिली आहे. आजच Story Library मध्ये Add करा आणि एका वेगळ्याच कॉलेज रोमांसच्या, मैत्रीच्या आणि सस्पेन्सने भरलेल्या प्रवासाला सुरुवात करा! 💛 वाचल्यानंतर Comment करून नक्की सांगा... पहिल्याच भागाने तुम्हाला किती गुंतवलं? 💬 Because... ❤️ Keep Reading. Keep Loving. Keep Bingeing. (All kinds of love are accepted in the form of ❤️ Likes • 💬 Comments • 🔄 Shares • ⭐ Ratings • 🎁 Stickers • 🌟 Superfan.) तुमची, Natkhat Nishi❤️
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हा भाग लिहिताना एकच प्रश्न होता — एखादी व्यक्ती आयुष्यात न भेटताच किती खोलवर रुजू शकते? ज्यांना अशा कथा आवडतात, त्यांच्यासाठी “Tu Bhet Na…” Link comment मध्ये 👇 आज किंजल इतकी आनंदी होती, आकृती भेटायला तयार झाली म्हणून!! इतकी खुश होती कि तिनी आज काही हि मागितले असते, कसली हि अट ठेवली असती तरी ती तयार झाली असती... तरी औपचारिकता म्हणून ती तिला विचारते 'सांग... काय अट आहे तुझी?' 'परत एकदा विचार करून घे तुला भेटायचे ना...' 'ए... हो ग... लवकर सांग... छळू नकोस असे...' 'हम्म.. मी येईल भेटायला तुला... हवं तर दिवस भर वाट बघायला हि तयार आहे मी तुझी ... पण... ' 'पण काय??' 'कोणत्या हि कारणाने जर आपण भेटलो नाही तर... ' 'तर?' 'तर... आपण आयुष्यात परत कधीच भेटायचे नाही... बोल मंजूर?' 'मी ना तू सांगशील त्या दिवशी तितके वास्ता भेटायला तयार आहे... तू म्हणशील तर आदल्या दिवशीच तिथे येऊन बसेल... पण तुला भेटायचा एक चान्स नाही मिस करणार... ' 'इतकं काय तुला मला भेटायचे आहे... ' 'नाही कळणार तुला.. मी भेटल्यावर सांगीन तुला... ' 'बरं ठीक आहे.. ' 'ए... पण मी ओळखणार कसं तुला?' 'ते तुझं तू बघ!!' 'मी तिथेच तुझी वाट बघत राहील... तेच सांगितले ना आता मी तुला... जर कोणत्या हि कारणाने आपण भेटू नाही शकलो तर त्यात हे हि येते कि तू मला ओळखू नाही शकली तर... आयुष्यात परत कधी नाही भेटायचे...' 'अगं पण असं कसं? मी तुला पहिले नाही... मला तुझा आवाज हि माहित नाही कसं शोधणार मी तुला... तुझा नंबर नाही ...' 'म्हणून तर पूर्ण दिवस दिला ना तुला... बघू शोधून काढतेस का ते...!!! मी तिथेच असणार ... मनाच्या डोळ्यांनी बघशील तर लगेच दिसेल तुला...' 'आणि तू आलीच नाहीस तर..??' 'माझ्यावर विश्वास नाही का?' 'तसं नाही... तुला तर मला तसे हि भेटायचे नाही... तू येणारच नाहीस आणि म्हणशील मी शोधू नाही शकले... मग?' 'हम्म... असं.. होय... मग तू सांग काय करायचे..??' किंजल बराच वेळ विचार करून तिला म्हणते, 'ठीक आहे... तू ये आणि तिथे पिवळे ऑर्चीड (आपल्या मैत्रीचे प्रतीक ) चे फुलं आणून ठेवायचे... तरच मी समजेल कि तू तिथे आली आहेस!!' 'ठीक आहे... चालेल मला ... मला काही प्रॉब्लेम नाही... अरे पण १ मिनिट आता ओर्चीड ची फुलं कुठे भेटतात, सीजन नाही ना...' 'ते मला काही माहित नाही कुठून हि जमव...' 'अरे ह्याला काय अर्थ? सीजन नाही तर कुठून मिळणार मला? आणि मैत्रीचे प्रतीक म्हणून हवे ना... मग पिवळी लिली ची फुले, पिवळे गुलाब किंवा अजून झेंडू... पिवळे ते आणते चालेल ..??' 'तू काय सोपं आव्हान दिलेस मला??... तुला हि मला भेटायचे तर काही कष्ट घ्यावे लागतील...' 'ठीक आहे!!! आता काय... ' 'मग कुठे भेटायचे?' 'तू सांगशील तिथे भेटू...' 'मला जरा विचार करू देत...!! मला इथले जास्ती माहित नाही... ' 'काय ग बाई... अजून फिरली नाहीस पुण्यात?' 'तुझ्या कॉलेज लाच भेटू नाही तर...' 'नाही... कॉलेज मध्ये नको.. मी सांगते ना... मला वेळ तर दे... मला आता काही सुचत नाही आहे.. तुला भेटण्याचा आनंद इतका आहे कि डोकं काही काम करत नाही आहे... ' 'उद्या पर्यंत सांग... मला त्या प्रमाणे बाकीचे काम बघावे लागेल... ठीक ना...' 'हम्म चालेल... उद्या सांगते...' 'चल बाय ' 'बाय!! मी आज खूप खुश आहे.. .थँक यु !!' 'चल.. बावळट ... थँक यु काय ?? मी पण खूप खुश आहे... बाय ...!!' किंजल ला आकृती ला भेटायचा इतका आनंद असतो, काय करावे सुचत नाही... माझ्या साठी पूर्ण दिवस ठेवणार आहे... कसा घालवायचा तिच्या सोबतचा दिवस ह्या विचारात तिला झोपच लागत नाही. दुसऱ्या दिवशी... 'आपण ना... सिटी प्राईड ला मूवी बघू ... ' 'ठीक आहे पण सिटी प्राईड ला मी फुलं कुठे ठेवायचे??' 'तिथे बाजूला मस्तानी हाऊस आहे आपण तिथे भेटू... तर तू तिथे थांब...तिथल्या कोणत्या हि टेबलं वर फुलं ठेवशील म्हणजे तू आलीस ह्याची मला शाश्वती!! मग मी तुला शोधलं कि आपण मुवि बघू ठीक ??' 'आणि नाही शोधलस तर? माझं माझं तिकीट मला पाठवून ठेव... म्हणजे माझी मुवि तरी वाया नाही जाणार..' 'हा चालेल... ' किंजल मनात विचार करते मी बुक केलेल्या जागेवर जाऊन मुवि बघणार... ?? किती सोपं होईल मला तुला शोधणं... 'काय चालेल...!! मी तुला इतकी बावळट वाट्ते का ग..??' 'कळले तुला...?? ' 'हो... ठीक आहे सकाळी ९ ला भेटू मग मस्तानी हाऊस ला?' 'हम्म.. तू पुण्याला कशी काय आलीस ते तर सांगितलेच नाहीस...' 'भेटल्यावर हि काही बोलू ना... नाही का..??' 'बरं.. जस तू म्हणशील... तू भेटायला तयार झालीस हेच खूप आहे माझ्या साठी ..' किंजल ला तिला खूप काही स्पेशल गिफ्ट घ्याचे असते.. परत ती तिला कधी भेटणार नव्हती... त्यामुळे ती तिच्या साठी गिफ्ट बघण्यात मागणं होते... !! तिच्या साठी एक कविता लिहिते... आणि त्या गिफ्ट सोबत ती कविता ठेवते... नाती असतात किती विचित्र आणि मजेशीर !!! काही अगदी जवळची, तर काही अशीच वरवरची... नाती काही क्षणातच जुळणारी, तर काही अनेक वर्षातही न जाणवणारी... काही नात्यांना देता येत नाही नाव, तरीही ती असतात खूपच खास ! काही नाती हृदयात घर करून रहणारी, दूर राहूनही कधीच न तुटणारी... तो दिवस उगवतो, किंजल च्या आनंदाचा पारा नसतो, ठरलेल्या वेळेत पोहचायचे म्हणून ती लवकर तयार होते. आज स्वतःला आरशात बघून भारी खुश होत होती, काय घालायचे हेच कितीतरी वेळ ठरत नाही, शेवटी ती तिचा बांधणीचा पीच कलर चा कुर्ता काढते. अर्धे केस बांधते आणि कपाळावर छोटीशी काळी टिकली लावते. आपल्या बॅग मध्ये ती तीच गिफ्ट आणि कविता ठेवते. मैत्रिणीची स्कुटी घेऊन ती निघते. कॉलेज पासून सिटी प्राईड लांब नसते पण तिला ट्रॅफिक लागते, त्यामुळे प्रत्येक सरकणारा क्षण मनात हुरहूर निर्माण करत होता. सारखी तिची धडपड सुरु असते, कधी एकदा मस्तानी हाऊस ला पोचते ह्याची. मस्तानी हाउस रस्त्याच्या पलीकडच्या बाजूने चौकातच होते, थोड्या वेळात ती त्याच्या समोर येऊन पोचते आणि सारखं त्या बाजूनी बघायचा प्रयत्न करत असते पण ट्रॅफिक एवढी होती कि तिला काही दिसेना... बस आता एक यू टर्न घ्याचा होता आणि तिची मंझिल तिच्या समोर होती... किंजल च्या मनात किती तरी प्रश्नांनी गोंधळ घातलेला .. कशी असेल आकृती, मी शोधू शकेल ना तिला? त्यांची हि पहिली भेट त्यांच्या आयुष्यभर लक्षात राहील ना... ?? काही प्रश्नांचे उत्तर मिळते काही नाही, प्रत्येक सरकणाऱ्या गाडी सोबत तिला त्यांचा भेटण्याचा क्षण जवळ येतांना दिसत होता. किंजल नि यू टर्न घेतला आणि दुसऱ्या बाजूचे ट्रॅफिक सुटायला एकच वेळ झाली, त्यामुळे एक भरधाव वेगानी दुसऱ्या बाजूनी गाडी सुटते आणि दोघांना काही कळण्याच्या आत गाड्यांची धडक झाली असते, किंजल पार वर उडाली आणि लांब फेकल्या गेली होती. आपल्या सोबत आता काय झाले ह्याचे हि तिला भान नसते तिची नजर फक्त मस्तानी हाऊस कडे लागून असते, ती तिथल्या प्रत्येक टेबलं कडे बघत असते आणि एका कोपऱ्यात तिची नजर पिवळ्या ओर्चीड च्या फुलांचा गुलदस्त्या वर पडते, न कळत तिच्या चेहऱ्यावर इतक्या वेदनेत हि एक आनंद उमलतो आणि ती तृप्त होऊन डोळे बंद करते. ~.~.~.~ "प्रतीलिपीवर सारख्याच धाटणीच्या CEO Romance, Surrogate Mother किंवा कौटुंबिक कटकारस्थानांच्या कथा वाचून काहीतरी वेगळं वाचायची इच्छा होतेय?" मग तयार व्हा... 💛 Fresh College Romance ❤️ Emotion 🕵️ Suspense 🤝 Friendship 💔 Unpredictable Twists अशी कथा, जिथे प्रत्येक भाग संपताना तुमच्या मनात एकच प्रश्न असेल... "आता पुढे काय होणार?" 👀 आणि आता येते सर्वात भन्नाट बातमी... 🥳 🎉 या कथेचे तब्बल १० Binge-Worthy Seasons आधीच लिहून पूर्ण झाले आहेत! हो... बरोबर वाचलंत! म्हणजे एकदा या कथेच्या प्रेमात पडलात की... "पुढचा भाग कधी येणार?" अशी वाट बघायची गरजच नाही! 😉 --- 📖 प्रतिलिपीवर नवीन आहात? मग हे नक्की वाचा... माझ्या कथा वाचण्यासाठी तुमच्याकडे दोन पर्याय आहेत. 🌟 पर्याय १: Superfan बना (Recommended) फक्त ₹२५/महिना मध्ये Superfan Membership घ्या आणि... ✨ सगळे Parts... सगळे १० Seasons एकाच वेळी Unlock करा! 📚 मनसोक्त Binge Read करा. 🚫 No Waiting. No Rok-Tok. ❤️ मी पण तुम्हाला मध्येच थांबवणार नाही! यासोबतच माझ्या इतर सर्व कथा आणि कथामालिकाही सलग वाचता येतील. --- 📚 पर्याय २: Free मध्ये वाचा माझ्या Pratilipi Profile ला Follow करा. Nishigandha Omanwar ❤️ 📖 १५वा भाग पूर्ण झाल्यावर, दररोज एक नवीन भाग मोफत Unlock होईल. 🔔 Profile Follow केल्यावर पुढचा Free Part उपलब्ध होताच Notification मिळेल. --- 👇 कथेची लिंक खाली कमेंटमध्ये दिली आहे. आजच Story Library मध्ये Add करा आणि एका वेगळ्याच कॉलेज रोमांसच्या, मैत्रीच्या आणि सस्पेन्सने भरलेल्या प्रवासाला सुरुवात करा! 💛 वाचल्यानंतर Comment करून नक्की सांगा... पहिल्याच भागाने तुम्हाला किती गुंतवलं? 💬 Because... ❤️ Keep Reading. Keep Loving. Keep Bingeing. (All kinds of love are accepted in the form of ❤️ Likes • 💬 Comments • 🔄 Shares • ⭐ Ratings • 🎁 Stickers • 🌟 Superfan.) तुमची, Natkhat Nishi. https://marathi.pratilipi.com/series/ti-laajate-jevha-parv-3-tu-bhet-na-by-online-svbjbcyutakh

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काही भेटी... फक्त काही मिनिटांच्या असतात. पण त्या आयुष्यभर मनात जिवंत राहतात... 💛 कधी प्रत्यक्ष न पाहिलेल्या व्यक्तीला भेटण्याची इतकी ओढ असू शकते का? एक वचन... एक आव्हान... पिवळ्या ऑर्किड्सचा एक गुच्छ... आणि त्या एका दिवसासाठी जपलेली असंख्य स्वप्नं... पण नियतीने त्यांच्यासाठी नेमकं काय लिहून ठेवलं होतं? ही भेट पूर्ण झाली का... की फक्त आठवण बनून राहिली? ~.~.~.~ "प्रतीलिपीवर सारख्याच धाटणीच्या CEO Romance, Surrogate Mother किंवा कौटुंबिक कटकारस्थानांच्या कथा वाचून काहीतरी वेगळं वाचायची इच्छा होतेय?" मग तयार व्हा... 💛 Fresh Bedroom Romance ❤️ Emotion 🕵️ Suspense 🤝 Friendship 💔 Unpredictable Twists अशी कथा, जिथे प्रत्येक भाग संपताना तुमच्या मनात एकच प्रश्न असेल... "आता पुढे काय होणार?" 👀 आणि आता येते सर्वात भन्नाट बातमी... 🥳 🎉 या कथेचे तब्बल १० Binge-Worthy Seasons आधीच लिहून पूर्ण झाले आहेत! हो... बरोबर वाचलंत! म्हणजे एकदा या कथेच्या प्रेमात पडलात की... "पुढचा भाग कधी येणार?" अशी वाट बघायची गरजच नाही! 😉 --- 📖 प्रतिलिपीवर नवीन आहात? मग हे नक्की वाचा... माझ्या कथा वाचण्यासाठी तुमच्याकडे दोन पर्याय आहेत. 🌟 पर्याय १: Superfan बना (Recommended) फक्त ₹२५/महिना मध्ये Superfan Membership घ्या आणि... ✨ सगळे Parts... सगळे १० Seasons एकाच वेळी Unlock करा! 📚 मनसोक्त Binge Read करा. 🚫 No Waiting. No Rok-Tok. ❤️ मी पण तुम्हाला मध्येच थांबवणार नाही! यासोबतच माझ्या इतर सर्व कथा आणि कथामालिकाही सलग वाचता येतील. --- 📚 पर्याय २: Free मध्ये वाचा माझ्या Pratilipi Profile ला Follow करा. Nishigandha Omanwar ❤️ 📖 १५वा भाग पूर्ण झाल्यावर, दररोज एक नवीन भाग मोफत Unlock होईल. 🔔 Profile Follow केल्यावर पुढचा Free Part उपलब्ध होताच Notification मिळेल. --- 👇 कथेची लिंक खाली कमेंटमध्ये दिली आहे. आजच Story Library मध्ये Add करा आणि एका वेगळ्याच कॉलेज रोमांसच्या, मैत्रीच्या आणि सस्पेन्सने भरलेल्या प्रवासाला सुरुवात करा! 💛 वाचल्यानंतर Comment करून नक्की सांगा... पहिल्याच भागाने तुम्हाला किती गुंतवलं? 💬 Because... ❤️ Keep Reading. Keep Loving. Keep Bingeing. (All kinds of love are accepted in the form of ❤️ Likes • 💬 Comments • 🔄 Shares • ⭐ Ratings • 🎁 Stickers • 🌟 Superfan.) तुमची, Natkhat Nishi https://marathi.pratilipi.com/series/ti-laajate-jevha-parv-3-tu-bhet-na-by-online-svbjbcyutakh

Friday, March 25, 2022

तुझ्या सोबतीची वाट...

 तुझ्या सोबतीची वाट...


भगवद गीता- आपला धर्म ग्रंथ, पण ती कधी वाचावी, शिकावी त्यात भगवंतांनी काय सांगितले आहे हे जाणून घ्यावे मला कधीच ह्याचे कुतूहल वाटले नाही, त्याला कारण म्हणजे आयुष्याच्या उतार वयात देव देव तर करायचे आहे असा समज असणारी मी ! 


पण आयुष्यात तू आलीस, तुझं ते अध्यात्मिक ज्ञान मला अचंबित करायचं, माझ्याच एवढी तू, पण किती समजदार, सहनशील? कसं जमतं, माझ्या सर्व प्रश्नांची उत्तरं मला गीतेत मिळणार म्हणालीस, एकदा माझ्या खातर गीता वाच म्हणालीस, मी पण चक्क घेतली वाचायला, अगदी न विसरता रोज एक अध्याय वाचून काढला, माझा हा प्रवास सुरु झाला! 

माझा असा समज झाला की तुला माझ्या आयुष्यात देवानी अध्यात्माकडे वळवण्यासाठी आणले, तुझं माझ्या आयुष्यात येण्याचं हेच कारण आहे! माझी अध्यात्माकडे ओढ वाढू लागली, नवीन नवीन गोष्टी समजत होत्या, किंवा एक नवा दृष्टिकोन मिळत होता.


अश्यातच मी जोडले गेले गीता परिवाराशी! 

गीता शिका, शिकवा, आचरणात आणा!!💐

माझ्या यासोबत अर्थात तू ही क्लास जॉईन केले, रोज सकाळी त्या क्लास साठी उठण्याची ओढ!! खूप सुंदर सुरवात व्हायची दिवसाची! किती किती चुकलं आपलं हे लक्षत आलं, गीता उतार वयात शिकायची नाही तर आयुष्यभर आचरणात आणायची गोष्ट आहे!


गीता शिकत असतांना आपण ही एक दुसऱ्याला समजू लागलो, एक दुसऱ्याच्या विचारांची देवान घेवान होऊ लागली, 


तू मला मी तुला ओळखू लागलो!

तू मला मी तुला गुंगूनू लागलो!


दिवस सरत होते लेवल 1 ची परीक्षा संपली, खरं तर तुझ्या मूळ3च मी ही परीक्षा दिली!! काही स्वप्न रंगवणे सुरू झाले! गीता च्या सर्व परीक्षा पास करायच्या आहेत, एक दुसऱ्याला ध्येय देऊ लागलो!!


तुझ्यामुळे माझा हा आध्यात्मिक प्रवास इतका सुंदर सुरू झाला आणि अजून ही सुरू आहे! 


पण मला खूप मोठे सुखद बक्षीस मिळाले, अगदी मन लावून गीता शिकण्याचे, एकाग्र राहण्याने! 


त्याच भगवंतांनी माझी भेट घडवून दिली तुझ्या सोबत - गीता मैत्री मिलन कार्यक्रमामुळे! माझं एक स्वप्न पूर्णत्वाला गेले!

तुझी भेट झाली!! बस अजून काय हवे होते!


मी हे सर्व समजत होते त्यांनी मला त्याच्या भेटीसाठी अग्रेसर करण्यासाठी केले होते, पण ह्या सर्व चक्रमागे करण होते तुझी माझी भेट घडवणे!!


आता असं वाटतं, गीता ला तू आयुष्यात नाही आणलं तर गीता नि तुला माझ्या आयुष्यात आणलं, माझी रुची गीतेत वाढणे, ते एकत्र गीता शिकणे, त्या सोबतच भेटीची ओढ निर्माण होणे... आणि चक्क गीता परिवाराने हा मिलन कार्यक्रम पुण्याला ठेवावा? 

त्यात तुला येत यावे? 

हे स्वप्न पूर्ण करायला त्यानी किती प्लांनिंग केली असेल ना? किती सूत्र हलवले असतील त्यानी? तुला मला एक छताखाली आणण्यासाठी? 


खूप कविता वाचल्या आज पर्यंत, खूप कथा वाचल्या 

एक अपूर्ण स्वप्न वाल्या, पण मी त्याची खूप आभारी आहे, माझं स्वप्न पूर्ण झाले, तुला भेटता आले!


आता ही जी तज्झ्या सोबतीची वाट त्यांनी दाखवली आहे ना मला त्यावर चालत राहायचं!! 



 Thank You Geeta Pariwar for these memories!!💐


 


मी कशी ग विसरेल तुला ?



Monday, February 28, 2022

 

सिक्रेट सायको – २

 

आश्लेषा रूम मध्ये पडल्या पडल्या त्या ट्रॉफी ला निहाळत बसली होती, त्या वरच ठळक अक्षरातले ते शब्द ‘हिलिंग टच’ मनाला खूप स्पर्शून गेले होते, ती ट्रॉफी म्हणजे जादुई दरवाजा होता, आश्लेषा ला आपल्या सोबत ती तिच्या भूतकाळात घेवून गेली... जिथून तिच्या ह्या प्रवासाला सुरवात झाली.

ते कॉलेज चे सोनेरी दिवस, स्वप्न रंगवण्याचे दिवस आणि स्वप्नात रमायचे दिवस! मित्र मैत्रिणी आणि खूप मज्जा मस्ती!

 

तेरी बातो में दिल खो स गाया, प्यार केहते जिसको वो हो स गया...

खुश हु मेईन इतना क्यू? तेरे प्यार मेईन चमकू जैसे जुगनू...

 

तिला मिळालेली ती पहिली शाबासकी... गुरुजींनी गर्वाने थोपात्लेली पाठ!

तीच ते शेवटच्या वर्षी आपल्या थिसीस वर दिलेले भाषण अजून हि किती स्पष्ट ऐकायला येत होत तिला?

स्य्कॉलोजी मधली फ्रेड ची थेरी, जी सांगते कि कोणत्या हि व्यक्तिमत्वाचे तीन भाग असतात, इड, इहो आणि सुपर इगो.

हे तिन्ही इड, इगो आणि सुपर इगो आपलयाला वागण्याला कारणीभूत असतात.

इड आपल्याला आपल्या रोजच्या गरजा पूर्ण करायला मदत करत असतो जसं कि

सुपर इगो त्यात आपल्याला २ गोष्टीतली काय बरोबर आणि काय चूक हे सांगत असते, चांगल्या रस्त्यावर चालण्याला सांगत असते. जेव्हा कि ह्या दोघंमध्ये समतोल राखण्याचे काम करत असते इगो.

औदितोरीम शांत गंभीर झाले होते, आश्लेषा ला त्यामुळे समजले होते जरा डोक्यावरून चाललंय प्रकार... त्यामुळे ती सर्वांना वेगळ्या पद्धतीने समजावण्याचा प्रयत्न करते. अचानक बोर्ड वर काढलेले सर्व मिटवून ती बोर्ड वर लिहिते... दिल चाहता है!! ऐकल आहे हे नाव??

नवीनच चर्चेत असलेली मूवी म्हणजे दिल चाहता है, प्रत्येकाच्या ओठी गाणी असलेली मूवी, प्रत्येकाला ती मूवी डायरेक्ट connect झाली, कॉलेज मध्ये सर्व मुल वो लाडकी है कहा गात होते तर मुली, जाणे क्यू लोग प्यार करते है गात होते!

कोणी स्वत:ला आकाश मध्ये शोधत होत तर कोणाला आपण समीर वाटत होतो! काही न काही कुठे तरी प्रत्येकाच्या आयुष्यावर त्या मूवी नि छाप सोडली होती! पण आश्लेषा नि त्या मूवी ला एका वेगळ्या लेवेल ला नेले !!

इतक्या गंभीर विषयावर बोलतांना आश्लेषा नि असं मूवीचे नाव का लिहिले? प्रत्येकाच्या मनात ते प्रश्न सुरू असतांनाच आश्लेषा नि बोलायला सुरू केले..

आपल्या थेसिस ला ह्या मूवी चा आधार घेवून खूप छान पद्धतीने समजावून सांगू लागली!!

“ह्या मूवी मध्ये इड, इगो आणि सुपर हेरो सर्व आहेत म्हंटल मी तर काय तुम्हाला विश्वास बसेल?” तिनी उलट प्रश्न केला सर्वांना. मूवी मध्ये इड आणि इगो? सर्वांच्या चेहऱ्यावर प्रश्न स्पष्ट दिसत होते. आश्लेषा च्या चेहऱ्यावर मात्र एक गूढ स्मित आले होते.

ती पुढे नाव लिहिते तीन बोर्ड वर... आकाश, समीर आणि सिड. तिची थेसिस होती आईसबर्ग ची ३ मैंद च्या states वर होती म्हणजे इड, इगो आणि सुपर इगो आणि दिल चाहता है चे हे हिरो आता आपल्याला काय शिकवणार?

आश्लेषा सर्वांना बघत सांगते असे बघत पुढे लिहू लागली!!

आकाश (अमीर खान) – म्हणजे आपल्या मनाचे इड स्टेट दर्शवते – तो बेसिक प्लेझर नियमांवर चालतो, तो आपले आयुष्य आपल्या गरजा भागाव्ण्यास्तही जगतो.

सिड (अक्षय खन्ना) – म्हणजे सुपर इगो ला दर्शवतो. सुपर इगो आणि इड ह्यात नेहमी द्वंद्व सुरू असते, जे बरोबर आहे ते करायचे कि आपल्या गरजा निभ्वाय्च्या?

समीर (सैफ आली खान) – म्हणजेच इगो. त्याला सारख एक सुवर्ण बिंदू गाठवा लागतो इड आणि सुपर इगो च्या मध्ये.

तर दिल चाहता है मधले हे तीन पत्र नसून एकाच्या मनाच्या ३ स्थिती आहेत!

इतकी कॉम्पलीकेतेड थेरी आश्लेषा नि विश्लेषण =करून इतक्या सोप्या पद्धतीने समजावून सांगितली होती! तिचं बोलण संपते न स्माप्ते हाल मध्ये टाळ्यांचा कडकडत झाला!

“ए.. आशु... मानले हा तुला...” जुही नि आश्लेषा ची तारीफ करत स्वताचीच कल्लर ताईत केली.

“का ग?”

“मग काय मूवी बघतांना पण तुझ्या डोक्यात हा अभ्यासच फिरत असतो न?” जुई नि डोळा मारत चिडवले.

आश्लेषा नि हलके स्मित केले.

“AD, आज तर तू जादूच केलीस!!” समोरून आशिष आला आणि आश्लेषा च्या हृदयाची धडकन थांबली जणू, सर्व black out... हृदयात बस, गिटार ची धून सुरू झाली आणि ते अपोआप गावू लागले...

आते जाते...

आते जाते, हँसते गाते

सोचा था मैं ने मन में कई बार

वो पहली नज़र, हलका सा असर

करता है क्यों दिल को बेक़रार

रुक के चलना, चल के रुकना

ना जाने तुम्हें है किस का इंतज़ार

 

तेरा वो यकीं, कहीं मैं तो नहीं

लगता है यही क्यों मुझको बार बार

यही सच है, शायद मैं ने प्यार किया

 

आशिष तिला विश करून गेला सुद्धा तरी आश्लेषा त्यातच हरवलेली, तिकडून जुई सोबत बाकीची गांग येवून आश्लेषा ला चिडवायला लागल्या.

“आमच्या स्कॉलर ला कोणी तरी मात दिली तर...” जुई तिला खांद्याला खांद्यानी मारत म्हणली आणि सर्व खिदळायला लागल्या!

“सय्या ने देखा ऐसे... में पाणी पाणी हो गायी...” इशा लाल झालेल्या आश्लेषा चा चेहरा हातात घेवून म्हणाली तशी आश्लेषा तिला धरून मारते.

त्यांची ती सर्व मस्ती आठवून आज हि आश्लेषा च्या चेहऱ्यावर smile आली होती आणि डोळ्यात पाणी भरून आले.

क्रमश: 

Wednesday, February 16, 2022

 सिक्रेट सायको – १

 

२४ जानेवारी २०२२

 

जगातील महत्वाचे आणि मोठे साय्कोलोजी कॉन्फेरेंस भारतात, पुणे इथे भरले होते!

रिपोर्टर रिपोर्ट देत होते आप आपल्या चॅनेल साठी... अशीच एक न्यूज चॅनेल वर झळकत होती.

“२०२२ IIER ११७५ इंटरनॅशनल कॉन्फेरेंस हि जगातील प्रमुख कॉन्फेरेंस आहे ज्यात रिसर्चर्स सायकॉलजी च्या क्षेत्रात आपले नवीन संशोधन मांडतील...”

घरी आरामात सोफ्यावर बसून घरचे न्यूज द्वारा उपडेट घेत होते!

“बाबा मला शिन चान बघायचं...”

“थांब रे... ”

“हे काय बोर बघत बसलात तुम्ही? प्लीज न बाबा... बदला न चानेल...”

हट्ट वाढला तसा रिमोट मुलाच्या हातात देवून तो झोपायला गेला.

 

तिकडे कॉन्फेरेंस मध्ये लोकांची गर्दी वाढू लागली होती! आज कॉन्फेरेंस एकाद्या फिल्म फेयर अवार्ड च्या फंक्शन पेक्षा कमी सजलेली नव्हती, त्याला शोभतील  असेच कॉन्फेरेंस अटेंड करणारे होते, रेड कार्पेट चालून येणारे.

 आज ची कॉन्फेरेंस जरा हटके होती आणि त्याला कारण होते ते म्हणजे पहिल्यांदा दिल्या जाणारे अवार्ड... सायकोलॉजी च्या क्षेत्रात पहिल्यांदा हा अवार्ड मिळणार होता कोणाला. त्यामुळे कोणाला हा अवॉर्ड मिळणार ह्याची चुरस लागली होती! त्यात नुकतेच धुमाकूळ घातलेल्या करोना मुळे प्रत्येकाकडे एक आपली आगळी वेगळी कथा आणि अनुभव होताच! ह्या काळात क्वचित कोणी भेटेल ज्यांनी आपल्या जवळच्यांना निराश, हताश बघितले नसेल, डिप्रेशन ला जवळून बघितले नसेल? इतक्या सर्व लोकांमध्ये इतक्या सर्व कथांमध्ये, कोणाला मिळणार होता तो अवार्ड? सर्वांचे डोळे त्या अवार्ड वर लागले होते!

हॉल मध्ये कुजबुज सरू होती! २४ -२५ जानेवारी म्हणजे मोठा दिवस होता!

तितक्यात रेड कार्पेट वर एक गाडी येवून थांबली, तुम्ही विचार कराल त्यातून एक स्लिम ट्रिम अभिनेत्री बाहेर पडेल आणि मग ती हात हलवून तिथे जमा असलेल्या पब्लिक ला अभिवादन करेल, पण त्यातून निघाले एक ऐन्शितले गृहस्त,  त्यांना बघून तिथे उपस्थित जमावाची मात्र प्रतिक्रिया तीच होती! त्यांना बघून प्रत्येकाच्या चेहऱ्यावर स्मित आले, “योगी दादा!!” बस एकच नाव सर्वांच्या ओठी होते!

सर्वांना बघून त्यांनी फक्त विनम्र हात जोडून नमस्कार केला. चालायला त्रास होत होता त्यांना म्हणून त्यांना आधार द्यायला सोबत एक महिला होती! योगी दादा म्हणजे भारतातले मदर टेरीसा चे मेल वरजन! दिन दुबळ्यांची फक्त सहायता करायचे असे नाही तर मनानी खचून गेलेल्यांना मार्ग दाखवण्याचे हि काम ते करायचे! भारतात मेंटल हेल्थ हा विषय धरून उचलणारे, शारीरक स्वस्थ जितके महत्वाचे आहे तितकेच मेंटल स्वस्थ हि गरजेचे आहे ह्यावर भरभरून व्याख्यान आणि पुस्तकं फक्त लिहिणारे योगी दादा नव्हते तर ते अमलात आणून पीडितांना मदत हि करत होते! अनेक हजारो कहाण्या त्यांच्या जवळ होत्या काही उरात पुरलेल्या तर काही केस स्टडी झालेल्या.

आज इतक्या दिवसांच्या त्यांच्या मेहनातीचे फळ म्हणून त्यांना ह्या कार्यक्रमाला चीफ गेस्ट म्हणून अमंत्रित केले होते! आपला तोल सांभाळत ते त्या कार्पेट वरून हॉल चा मार्ग चालत निघाले.

बाहेर रिपोर्टर लोकांनी गर्दी केली होती योगी दादा एक वाक्य तरी त्यांच्यासाठी बोलावे हा प्रयत्न होता प्रत्येकाचा.

योगी दादा सोबत सर्व मान्यवर हॉल मध्ये पोहचतात, योगी दादांना बघून त्याचं स्वागत टाळ्यांनी होतं. टाळ्यांच्या आवाजात हॉल गजबजला.

ह्या वर्षी ची थीम होती “एक्क्सपेरिमेंटल सायकॉलॉजि इन क्रॉस कल्चर सेटिंग"

वेगवेगळ्या प्रांतातून आपले अनुभव आणि रिसर्च वर बोलायला लोक आले होते.

स्टेज वर प्रेसेंटेटशन द्यायला सर्व सेटअप तयार केले होते! मान्यवरांच्या खुर्च्या खाली पहिल्या रांगेत होत्या!

हॉल भरला होता, अंधार करण्यात आला आणि एक एक करत कार्यक्रमाला सुरवात झाली! इतका मोठा विखुरलेला विषय होता हा आणि तितकेच भव्य दिव्य प्रत्येकाचे अनुभव! कोरोनाच्या काळात कोणी अनुभवलं नव्हतं, विचार हि केला नव्हता इतका एक्सपेरिमेंट झाला सर्वांच्या साय्कोलोजी चा! जग तयार नव्हते ह्या महामारी साठी! आपल्या जवळच्या लोकांपासून लांब होणे काय असते हे तर आपण अनुभवतोच पण त्यांचे अंतिम दर्शन हि न करता यावे असं कधी होईल असा विचार हि कोणी केला नव्हता. सर्व एकत्र असून एकटे पडले होते. दिवस-रात्र बस उद्याचा दिवस कसा येयील ह्याची चिंता! सर्वात जास्ती त्रास सहन केला तो खालच्या वर्गानी, करून का होत नव्हताआ, आजारी तर काही पडत नव्हते पण उपाशी राहून मारायचे दिवस आले होते!

 

सकाळची संध्याकाळ झाली....

वेळ होती अवार्ड देण्याची, स्टेजवर ट्रॉफी आणण्यात आली, मेडल्स आणण्यात आले! आपल्या आपल्या क्षेत्रातून उत्तम कामगिरी करणार्यांना आज सम्मानित करणार होते, ती ट्रॉफी कोणाला मिळणार ह्याची उत्सुकता सर्वांना होती. एक एक करत सर्वांचे नाव पुकारण्यात आले. मेडल अन सर्टिफिकेट देऊन गौरव करण्यात आला.

“आणि आता मी स्टेज वर आमंत्रित करू इच्छितो आपल्या चीफ गेस्ट योगी दादांना प्लीज स्टेज वर येवून तुमच्या हसते आमच्या स्टार ला हा अवार्ड द्यावा हि विनंती!”

 

तसे योगी दादा उठू लागतात, त्यांना मदत करत त्यांना सोबत स्टेज वर बसवून त्यांच्या सोबतची महील वळते, तसे योगी दादा तिचा हात धरून तिला थांब म्हणतात, त्यांना काही त्रास होतोय का वाटून ती तिथेच थांबते. तसं त्या चिठ्ठीत नाव वाचून पुकारण्यात आले...

“आणि आपण सर्व ज्या क्षणाची खूप आतुरतेने वात बघत होतो तो क्षण आला आले... आज च्या संध्याकाळचा सर्वात प्रेस्टीजियस अवार्ड जात आहे... आश्लेषा देश्मुक ह्यांना....”

आश्लेषा चा हात तसा योगी दादा सोडतात ती अविश्वासात त्यांना बघत होती, “अगं खाली जावून परत वरती कशाला यायचं, मला म्हाताऱ्याला नको वाटलं तसं .. म्हणून थांबवून घेतलं तुला...” ते डोळे मिचकावत म्हणले तिला...

आश्लेषा च्या डोळ्यात आनंदाश्रू आले! ती त्यांच्या समोर येवून उभी होते आणि ते तिच्या हातात ती झाकाक्णारी, चकाकणारी ट्रॉफी  देतात...

आश्लेषा त्या ट्रॉफी ला बघतच राहते...

‘हीलिंग टच!!’ ती त्या वरचे शब्द स्वत:शी कितीदा वाचत होती! तिला विश्वासच बसत नव्हता, हि ट्रॉफी तिला मिळाली होती! परतीच्या रस्त्यावर ती सारखी त्या ट्रॉफी ला बघत होती!

“दादा, मला कशी काय मिळाली?”

“तू कामच असे केले आहेत बेटा!! अशीच चालत रहा, लोकांच दु:ख कमी केलं कि आपल्या पदरात आपो आप सु:ख पडतं!”

आश्लेषा हसत होती! “यु हीलड सो मेनी पिपल...”

ते वाक्य ऐकून आश्लेषा स्वत:शी हसली आणि स्वत:शीच म्हणली, “आय हिल्ड मायसेल्फ!!”

 

आज आश्लेषा ला झोप काही येत नव्हती! डोळे बांध केले कि सारखे ते शब्द कानात ऐकू यायचे!!

“तू न... तू तर सायको आहेस...” ते शब्द ऐकून तिला येत असलेली झोप निघून जायची!

“खरंच यु आर सायको...”

सामन्य माणसाला असं बोलल्यावर राग येयील, पण आश्लेषा त्यावर मंद हसायची! हवेहवेसे वाटायचं त शब्द... कधी ऐकलं नाही की मिस करायची.

पण आज ते शब्द कोण जाणे का तिच्या डोळ्यात पाणी आणत होते! नक्की ते आनंदाश्रू होते अवार्ड चे कि वेदनेने निर्माण केलेले? आज मिस करत होती कदाचित ती स्वतःची पदवी? सायको ?? हीलिंग टच पेक्षा ते नाव जस हवेसे वाट होते?....

 

क्रमश:

Thursday, December 31, 2020

द रुथलॅन्ड | #१

 द रुथलॅन्ड | #१ 


"केयूर...र र र !!" मागून हाक आली त्यामुळे तो थांबला. धीरज धापा टाकत त्याच्या जवळ आला, "मित्रा तिकडे कुठे चाललास?"

केयूर त्याला काही कळलं नाही असं बघतो... "अरे आत चल ना! किती मोठी लाँच पार्टी आहे!!"

"कशाची?" केयूर त्यात काही रुची न दाखवत निघायला लागतो, मग वळून म्हणतो, "हे न्यू इयर पार्टी अँड ऑल मला नाही आवडत!"

"तुला माहित नाही?" धीरज अष्टकर्याने बघतो तर केयूर मान हलवून नाही सांगतो. धीरज त्याला ओढतच स्वतः सोबत नेतो, तो दार ढकलतो, समोर अवाढव्य मोठ्या मैदानात मोठे मोठे बॅनर लावलेले, केयूर ते बॅनर वाचायचा प्रयत्न करतो, "द रूथलँड, म्हणजे?"

"अरे गेम च नाव आहे!!" धीरज तुला काही की  माहित नाही असं बघतो!

"गेम?"

"आज रात्री आपल्या शहरातलं, अरे शहरातलं काय भारतातील सर्वात मोठा गेम लाँच इव्हेंट आहे!! सर्वात मोठं, नवीन आणि भव्य..."

"कळलं.. तू काय त्यांचा मार्केटिंग एक्सिक्युटीव्ह आहेस का?"

"केयूर असं काय करतोस यार, आपण जाऊयात ना त्या पार्टी ला..."

"अरे बोर असतात रे अश्या पार्ट्या वगैरे!"

"अरे फ्री डिनर, डान्स, दारू, मुली आणि बरच काही आहे, आपलं न्यू इयर सेलिब्रेशन हि होऊन जाईल ते हि फुकटात!!" केयूर त्याच्याकडे ब्लॅक बघतो, "तुला माहिती ना ह्या अश्या पार्टीझ  मला नाही आवडत आणि त्यात मुली वगैरे, मला नाही जमत त्यांच्याशी बोलायला."

"बरं बाबा नको बोलूस, पण माझ्या सोबत तर चल, तुझ्या शिवाय मला कोणी मित्र आहे का? मला तर एन्जॉय करू दे!!" केयूर ते ऐकून हसतो आणि त्याला बघून म्हणतो, "मला तर खूप मित्र आहेत ना तुला सोडून!!" त्यावर धीरज हि हसला आणि त्याच्या खांद्यावर हात ठेवून तो त्याला आपल्या सोबत कॅन्टीन ला घेऊन जातो... सर्व कॉलेज मध्ये गेम चे पोस्टर्स, स्लोगन्स लागले होते, सर्व बघत केयूर धीरज ला म्हणतो, "तयारी तर सॉलिड केली आहे ह्या लोकांनी, बघायला हरकत नाही काय आहे ते!"

धीरज हि दात काढत आनंदानी त्याला सहमती देतो. "संध्याकाळी ६ ला सुरु होणार आहे पार्टी, उशीर करू नकोस हा..." केयूर बरं ठीक आहे असं म्हणून मागवलेल्या बर्गर वर लक्ष देतो. 

"ए... आणि काही तरी मस्त घालून येशील हा!" केयूर धीरज च्या वाढणाऱ्या अपेक्षांना दुर्लक्ष करत सर्व ला ठीक आहे करत आपल्या बर्गर वर लक्ष केंद्रित करतो.


कॉलेज संपवून दोघे आपल्या घरी जातात, संध्याकाळच्या पार्टी साठी तयारी करायची होती, केयूर तर धीरज साठी चालला होता, धीरज आणि केयूर जीवाला जीव लावणारे मित्र, दोघे मुंबई च्या प्रसिद्ध 'हॅरोल्ड' कॉलेज चे विद्यार्थी होते, सेकण्ड इयर ला शिकत, धीरज चा अभ्यासापेक्षा एक्सट्रा करिक्युलर ऍक्टिव्हिटी मधेच जास्ती लक्ष असायचं, त्याला आवडायचं म्हणून केयूर हि त्यात खेचला जायचा, 

आज वर्षाचा शेवटचा दिवस, सर्व प्लॅन करत होते पार्टी साठी, डिस्क ला जायला, पण आता तर कॉलेज नीच त्यांची पार्टी ची सोय केली होती!! द रुथलॅन्ड च्या लाँच पार्टी मार्फत. 


घरी पोचला तसा केयूर शांत झोपला. त्याच्या वयाची मुलांची एव्हाना ३-३ ब्रेकअप झाले होते पण केयूर ला ब्रेकअप चा ब्र हि माहित नव्हता, तसं त्याला प्रेमाचा प्र तरी कुठे माहित होता, मुलींशी बोलायचं म्हंटल कि ह्याचा श्वास अडकायचा, जो पर्यंत बोलणार नाही तो पर्यंत प्रपोज होणार नाही, गाडी त्यामुळे पुढे कशी जाणार? आपण सिंगल बरे असं मत ठामपणे दर्शवणारा केयूर.


केयूर ला जाग आली तेव्हा ६ वाजून गेले होते आणि धीरज त्याला फोन करून करून थकला होता, त्याच्या फोन च्या आवाजानेच केयूर ला जाग आली होती, फोन अजून हि वाजत होता त्या जाणिवेने तो फोन उचलतो, "मी वाट बघतोय केयूर, कुठे आहेस? येत आहेस ना, डिच नको करुस!!"

धीरज च बोलणं ऐकून केयूर ची झोपच उडाली, हा इथे मस्त झोपला होता, तो त्याला आलो आलो करत फोन ठेवतो आणि पटकन तयारी ला लागतो, "काय घालू?" तो डोकं खाजवत कपाटासमोर उभा होता. त्यानी पटकन आपली ब्ल्यू जीन्स आणि व्हाईट टी-शर्ट काढलं, लगेच शॉवर घेऊन आला आणि केस सेट न करताच भरभर कपडे घालून तो निघाला, निघतांना त्याच्या लक्षात आलं, रात्री उशीर होईल तर आपलं लेदर जॅकेट खांद्यावर अडकवत तो धावपळ करतच बाईक जवळ पोचला, 'टर्मिनेटर!!' तो स्वतःशी हसून बाईक कडे बघतो आणि तिची किस घेत तिला सांगतो, "टर्मिनेटर, धीरज वाट बघतोय कॉलेज मध्ये हा माझी.. आता तुला मला वेळेत पोहोचवायचं आहे!!"


रस्त्यावर गाडी धूम पळवत केयूर कॉलेज मध्ये पोहोचतो, ऑडिटोरियम ला धावत जातो, कचाकच गर्दी झाली होती सर्वत्र, धीरज ला कुठे शोधणार हा विचार मनात आलाच होता कि धीरज ची थाप त्याच्या खांद्यावर पडली, "मला माहित होतं तू नाही शोधू शकणार म्हणून मग मी दारात पहारेकरी बनून थांबलो तुझी वाट बघत..." धीरज त्याला किती ओळखतो म्हणून तो स्माईल करतो, दोघे समोर बघतात, डोळे दिपावुन टाकणारे फ्लॅश लाईट्स नि सर्वत्र उजेड केला होता आणि मागे कानठाळ्या बसतील अश्या आवाजात आमिर च गाणं वाजत होतं... 


केयूर आणि धीरज अजून ते वातावरण आत्मसाद करत होते, तेव्हा माईक वर अनाउन्समेंट झाली, 

"कोई कहे केहता रहे... हम लोगों की ठोकर में है यह ज़माना!! राईट गाईज?"

प्रेक्षकांतून होकार गुंजला... "सो गाईज रेडी टू वेकम २१२१?" परत होकार वाऱ्यात गुंजला!!

"अँड हाऊ अबाऊट द फर्स्ट ग्लिम्स ऑफ द रुथलॅन्ड?" तिकडून को होस्ट चा आवाज आला...

"ये... येस...!!" करत सर्वत्र जल्लोष सुरु होता आज हॅरोल्ड ची वास्तू दणाणून टाकली होती सर्वांनी!

"ओके, चला तर मग... " म्हणत दोघांनी ऐक मोठ्या स्क्रिन वरचा परदा काढला, "रुथलॅन्ड ची सैर करू!! आज हा कार्यक्रम अख्या भारत देशात सुरु आहे!! रुथलॅन्ड ला आज सर्व भारतात लाँच करत आहोत, तुमच्या सारखेच प्रत्येक शहरात यंग जनरेशन क्रेझी होतं आहे, तुमचा जास्ती वेळ न घेता मी सांगतो रुथलॅन्ड नक्की आहे काय?"


"सुहास, काय म्हणतोस सांगायचं का मग रुथलॅन्ड बद्दल...??"

"नक्कीच शालिनी, पण त्या आधी मी सॅम्पल किट वाटल्या होत्या त्या सर्वांना मिळाल्या का!!" सुहास ऑडियन्स कडे माईक धरतो आणि सर्व एका सुरत हो म्हणून ओरडतात. 


"काय आहे ह्यात?" केयूर त्याच्या किट कडे बघत म्हणतो.

"श... शांत बस आणि ऐक रे..." धीरज केयूर ला शांत बसवतो.


"आज आपण एक अश्या दिवशी जमलो आहोत जेव्हा २१२० ला बाय करून २१२१ चे स्वागत करणार आहोत!! त्याच सोबत आपण स्वागत करणार आहोत मॅजिक ब्रदर ह्यांनी बनवलेल्या गेम चा म्हणजेच द रुथलॅन्ड चा... तर तुम्हाला सर्वांना प्रश्न पडला असेल काय आहे हे रुथलॅन्ड?"

"नक्कीच सुहास, मी तर खूप उत्सुक आहे जाणून घ्यायला..."

"शालिनी रुथलॅन्ड हा आर्टिफिशिअल इंटीलीजेंस वर आधारित एक गेम आहे!! 

"गेम आहे मग ह्यात एवढे खास काय?" शालिनी सर्वांच्या वतीने प्रश्न मांडते.

"मला हा प्रश्न अपेक्षितच होता! हा गेम तुम्ही फक्त खळणारच नाही तर अनुभवू शकणार आहात, हा साधा सुद्धा विडिओ गेम नाही, हा गेम घेऊन जाईल तुम्हाला रुथलॅन्ड वर जे आपल्या नावाप्रमाणेच रूथलेस आहे, गेम मध्ये एन्ट्री केल्यावर वापस बघणे नाही आहे, रुथलॅन्ड वर तुम्हाला मिळणार आहे आयुष्याचे अनुभव, ब्रेथटेकिंग ऍडव्हेंचर आहेत इथे!! असे मोमेंट्स जे तुमच्या अंगावर शहारे आणतील!"

"वाह!! मला तर राहवत नाही आहे, आत्ता खेळावासा वाटतोय हा गेम!!" शालिनी अति उत्साहात म्हणाली.

"नक्कीच!!" सुहास तिच्या डोळ्यात बघतो आणि मग इतरांना म्हणतो, "पण शालिनी हे इतकं सोप्प नाही!" शालिनी अर्थातच असं त्याला बघते, सुहास थांब मी सांगतोय असं बघत म्हणतो, "हा गेम चालणार आहे १ महिना!!"

"१ महिना!!" सर्व ऑडियन्स मध्ये खुस फूस सुरु झाली...

"हो... १ महिना तुम्ही ह्या जगात नसणार आहात... तुम्ही ट्रासनपोर्ट केले जाणार आहात रुथलॅन्ड वर, तुम्ही तिथे  असणार आहात, नवीन नवीन अनुभव घेत!!" ते ऐकून सर्वत्र शांतता पसरली, सर्वांच्या मनातले प्रश्न ओळखून सुहास पुढे म्हणतो, "गाईज आम्हाला तुमचं शैक्षणिक नुकसान नाही करायचं... रुथलॅन्ड ची ट्रिप हि तुमच्या सुट्ट्या सुरु होतील तेव्हा सुरु होणार आहे!!" सर्व अजून हि खुसफुसत होते, सर्वांना शांत करत सुहास पुढे म्हणतो, "तर मग गाईज तुम्हाला आवडेल का खेळायला? आवडेल का जायला रुथलॅन्ड वर? कुठे आहे हे रुथलॅन्ड? खूप प्रश्न पडले आहेत ना?"

सर्व नक्कीच, हो ना असे म्हणतात तेव्हा सुहास पुढे म्हणतो, "आम्ही तुम्हा सर्वांसाठी एक गोल्डन चान्स घेऊन आलो आहोत, आज रात्री १२ वास्ता संपूर्ण भारतात जिथे जिथे हि लाँच पार्टी सुरु आहे, सर्वांची एक लॉटरी निघणार आहे... " सर्व श्वास रोकुन सुहास काय बोलत आहे ऐकत होते, "लॉटरी मध्ये भाग कसा घ्यायचा हाच प्रश्न आहे ना?" तो स्वतःशी हसून म्हणतो, "मी तुमच्या पर्यंत आता ज्या सॅम्पल किट वाटल्या आहेत त्यात बघा तुमचं हे लॉटरी च तिकीट पण आहे! जस्ट फील इट अँड पुट इट इन द लॉटरी बॉक्स!!" सुहास स्टेज वर ठेवलेला बॉक्स दाखवतो!!

"हे काम तुम्हाला १२ च्या आधी करायचं आहे!! १२ ला भारतभरातील सर्व मिळालेली तिकीट आमचे सर्वर शफल करून २ लकी विनर काढतील!! त्यांना रुथलॅन्ड फ्री खेळायला मिळेल... हा ब्रेथटेकिंग अनुभव फ्री घेता येणार आहे!!" सर्व तोंड वासून बघत होते, कान देऊन ऐकत होते, "मग तुम्हाला व्हयचं ना तो लकी विनर!! कशासाठी थांबलात तर... उघडा आपली किट आणि घ्या ते तिकीट!! पण हा सावध रहा तिकीट जमा करायच्या आधी १० वेळा विचार करा, १ महिना रुथलॅन्ड वर रहावे लागेल! जमेल ना? जमणार असेल तरच नाव द्या... हा गेम कमजोर दिल वाल्यांसाठी नाही आहे! एकदा तुमचं नाव सिलेक्ट झालं तर मग तुम्हाला माघार घेता येणार नाही... कारण तुम्हीच बघा इतके लोक आहेत आतुर, त्यात जर तुमची निवड झाली आणि तुम्ही माघार घेतली तर तुम्ही किती लोकांच्या स्वप्नांवर पाणी घालणार, आणि आम्ही हि लॉटरी परत नाही काढू शकणार!! तेव्हा लॉटरी तिकीट सबमिट करतांना मनाशी दृढ निश्चय करून मगच टाका... हि आमची नम्र विनंती आहे!!"


धीरज मंत्रमुग्ध होऊन सुहास ला ऐकत होता, केयूर नि आपल्या हातातलं किट बघितलं, तो त्यावरचे इंस्ट्रक्शन वाचत होता, धीरज नि घाईत आपल्या किट मधून तिकीट काढून त्यात मागितलेली माहिती भरून पण टाकली, केयूर तिकीट वाचत होता, "एवढी पर्सनल माहिती का हवी आहे ह्यांना... माझा ई-मेल ऍड्रेस पाहिजे ठीक आहे, घरचा ऍड्रेस घेऊन काय करायचं ह्यांना..." केयूर चा अति शहाणपणा बघून धीरज ची चिडचिड वाढत होती, "केयूर... भर ना रे पटकन... ते बघ स्टेज वर किती लाईन लागली आहे!!"

"अरे १२ पर्यंत वेळ आहे!!"

"म्हणून काय आपण १२ ची वाट बघायची आहे का..."

"बरं चिडू नकोस... मी भरतो!!" केयूर जीवावर येऊन आपली माहिती भरत होता, तोपर्यंत धीरज नि आपल्या किट मध्ये अजून काय काय आहे बघायला सुरवात केली, त्यात रुथलॅन्ड च एक टी-शर्ट होतं आणि निऑन च वॉच, धीरच लगेच ते आपल्या मनगटावर चढवतो, रात्रीच्या अंधारात ते चमकत होते, "अरे पण हे कसलं घड्याळ आहे? ह्याला काटे नाहीत, आकडे नाहीत, वेळ कसा कळणार?" धीरज उत्सुकतेने घड्याळी ला बघत होता, केयूर नि आपली सर्व माहिती भरली, तिकीट ला बघतच तो धीरज ला चल म्हणतो. धीरज त्याच्या मागे मागे निघतो, "केयूर... हि घड्याळ बघ ना, किती वाजलेत संग ना..."

केयूर त्याच्या हात धरून मनगटावर बघतो आणि सांगतो, "९:४० झालेत!!"

धीरज डोळे फाडून त्याला बघतो, "कसं कळलं तुला? ह्या घड्याळी ला ना काटे आहेत ना आकडे..."

"पण माझ्या घड्याळी ला आहेत..." केयूर त्याला आपलं घड्याळ दाखवतो आणि मोठ्याने हसतो!! "अरे डंबो, ते काय तुला साधं सुध घड्याळ देणार होते का? काही असेल त्यात हि रुथलॅन्ड शी रिलेटेड गूढ लपलेलं..." धीरज त्याला पॉईंट आहे असं बघतो!! दोघे जाऊन स्टेज पुढे उभे होते, स्टेज वर ठेवलेले पुतळे बघत केयूर च्या मनात प्रश्न सुरु होते... सुहास आणि शालिनी लोकांना काही अडचण आहे का ते बघत होते, सुहास त्यांच्या जवळ येऊन त्यांना विचारतो, "काही अडचण नाही ना..." धीरज मान हलवून नाही सांगतो..

केयूर त्याला म्हणतो, "अडचण नाही एक प्रश्न आहे विचारू का?" सुहास हो असं बघतो, "ते पुतळे कोणाचे आहेत?"  

"ओह्ह... ते तर सांगायचं राहिलंच!!" सुहास काही आठवलं असं बघून सॉरी म्हणत स्टेज वर चढतो आणि परत माईक वर बोलतो, "गाईज तुम्ही गेम मध्ये असाल ना तेव्हा तुम्ही ह्या अवतारात असणार!! तुम्हाला ह्यांना भेटायचं का? आवडेल का?"

शालिनी हि त्याला जॉईन झाली... "हि आहे टिनसले आणि हा आहे एरियन!! तर गेम मधले तुमचे अवतार बघून कसं वाटतंय? कोणाला बनायला मिळेल टिनसले? तिचे डोळे बघा कसे चमकतायेत!!" शालिनी सर्वांना हसून बघते. "बघुयात इथून कोणाची निवड होते का गेम साठी!!" सुहास शालिनी ला बघतो. 


"... एवढेच नाही गाईज!! तुम्हाला सर्वांना आज इथे रुथलॅन्ड चा फील घेता येणार आहे!! मुलींना टिनसले  होऊन बघता येणार आहे तर मुलांना एरियन बनून!!" सर्व कसं असं बघतात, आम्ही इथे सर्वत्र AI स्लॉट इन्स्टॉल केले आहे तुम्हाला तुमच्या मोबाईल वर एक टेम्पररी अँप इन्स्टॉल करायचं आहे, आणि बस... अँप वर पासवर्ड काय टाकायचा हे तुमच्या किट मध्ये दिलेला आहे, प्रत्येकाचा पासवर्ड वेगळा आहे तर आपला आपला पासवर्ड वापरा!! एन्जॉय गाईज!!"


धीरज आणि केयूर आपले तिकीट बॉक्स मध्ये टाकतात. 


धीरज लगेच आपल्या मोबाईल वर अँप इन्स्टॉल करून पासवर्ड टाकून तयार होता, केयूर त्याचं अनुसरण करत आपल्या किट मधला पासवर्ड टाकतो... "अरे हे काय ह्यांनी मला एरियन नाही बनवलं... मी टिनसले झालो आहे!!" केयूर निराश झाला, "चालतं रे चल ना आपण खेळू..."

दोघांनी आपले AI गोगल चढवले आणि दोघे गेम खेळण्यात मग्न झाले, "अरे काय मस्त गेम आहे!!" धीरज खेळतांना मोठ्यांनी ओरडत होता!! सुहास त्याच्या जवळ येऊन म्हणतो, "तुम्हाला गेम आवडला ऐकून खूपच छान वाटले पण खरोखरच गेम खूप वेगळा आहे !! हे तर तुम्ही AI मुळे मोबाईल वर खेळू शकत आहात, कंटाळा आला कि मोबाईल बंद करता येईल....  पण खऱ्या गेम मध्ये कोणतीच पळवाट नाही आहे... " केयूर आपले गॉगल काढून सुहास ला बघतो, तो मी खरं सांगत आहे असं त्याला बघतो आणि केयूर स्मित करायचा प्रयत्न करतो. 


बराच वेळ गेम खेळून होतो, लाईफलाईन संपते तसा गेम संपतो, दोघे अगदी त्यांनी कसली धमाल केली हे एकमेकांना सांगायला आतुर होते ती चर्चा करतच ते तिथून निघतात, वातावरण अजून हि तापलेलं होतं, मागे गाणी सुरु होती! धीरज ची डान्स करायची इच्छा होती केयूर ला माहित होते, त्यामुळे ते सुद्धा सुरु असलेल्या मुलांच्या गोंधळात शामिल होतात, बराच वेळ दोघे डान्स करतात आणि मग भूक लागली आहे हे जाणवायला लागते!! दोघे मग जेवणाकडे वळतात, "किती वाजले रे?" केयूर धीरज ला विचारतो, तो मुद्दाम विचारत आहे हे धीरज ला माहित होते, "अरे घड्याळ बघ ना तुझं!!" केयूर त्याच्या मनगटाकडे बघून परत चिडवत म्हणतो, मग स्वतःच आपलं घड्याळ बघून म्हणतो, "११ वाजले... धीरज... ह्या वर्षाचा शेवटचा तास!!" धीरज ते ऐकून अरे हो रे असं त्याला बघतो! दोघे आपल्या प्लेट्स घेऊन एका निवांत ठिकाणी जाऊन जमिनीवर बसतात. एक मोठा श्वास सोडत केयूर म्हणतो, "काही वेळात हे वर्ष संपणार, २१२१ आपल्या सोबत काय घेऊन येईल?"

"नक्कीच चांगलंच असणार आहे २१२१ आपल्या साठी!!" केयूर कसं काय असं बघतो...

"अरे मग सुरवातच झोंबलास्टीक होणार ना भावा... मग वर्ष पण तसंच जाणार ना..." केयूर त्याला टाळी देत हो ना असं बघून हसतो आणि दोघे आपले ड्रिंक्स आणि जेवण एन्जॉय करत आपले त्या वर्षातले शेवटचे क्षण घालवतात. त्याचवेळी नवीन वर्षाच्या नवीन उमेद मनात जन्म घेत होत्या!


जसा जसा वेळ पुढे सरकत होता १२ कडे सर्वांचे लक्ष होते आज, फक्त नवीन वर्ष सुरु होणार म्हणून नव्हते तर रुथलॅन्ड वर ते लकी २ कोण व्यक्ती जाणार ते हि जाहीर होणार होते, त्यामुळे सर्वांच्या हृदयाची धडधड वाढलेली होती, भारतातला प्रत्येक तरुण हीच आशा लावून होता कि त्याचं नाव निवडून यावं, हा लकी चान्स त्याला मिळावा! नक्की कोणाच्या नशिबात रुथलॅन्ड होते हे कोणाला माहित नव्हते, समोर असेलेले क्षण एन्जॉय करण्यात सर्व मग्न होते!


क्रमश:





तुम्हाला एक वेगळ्या दुनियेच्या सफर वर घेऊन जायला आले आहे, मग तय्यार? २१२१ मधली, हो बरोबर वाचले २१२१ मधलीच आज पासून १०० वर्षानंतर ची हि निराळी दुनिया अनुभवायला? तुमच्यासाठी हि नवीन रोमांच  आणि ऍडव्हेंचर ची आगळी वेगळी कथा घेऊन आले आहे, आशा आहे तुम्हाला आवडेल! खाटा जास्ती मोठी नसणार आहे फक्त १०-१२ भाग असतील आणि मी रोज पोस्ट करणार आहे!!

सबसे मुश्किल जाँच वो होती है, जहाँ आपका दिल पागलों की तरह यह दुआ कर रहा हो कि मुजरिम बेकसूर निकले। नवंबर की उस उदास और खामोश दोपहर में, शर्...